धनबाद आने वाले यात्रियों के लिए दिवाली और छठ से पहले रेल टिकट हासिल करना मुश्किल हो गया है। मुंबई और दिल्ली सहित कई बड़े शहरों से चलने वाली नियमित ट्रेनों में नवंबर की बुकिंग तेजी से भर रही है। कुछ सेवाओं में प्रतीक्षा सूची का टिकट मिलना भी बंद हो गया है, जबकि अन्य ट्रेनों में सीमित सीटें ही बची हैं।
चार नवंबर की लोकमान्य तिलक टर्मिनस-धनबाद साप्ताहिक एक्सप्रेस में स्लीपर से वातानुकूलित श्रेणियों तक सीटें भर चुकी हैं। केवल थर्ड एसी इकोनॉमी में प्रतीक्षा सूची की बुकिंग उपलब्ध बताई गई है, जो 97 तक पहुंच गई है। मुंबई-हावड़ा मेल में सात नवंबर तक स्लीपर से सेकंड एसी श्रेणी में ‘नो रूम’ की स्थिति है।
मुंबई के अलावा पश्चिम और दक्षिण भारत से आने वाली ट्रेनों पर भी दबाव दिखाई दे रहा है। तीन नवंबर की भावनगर टर्मिनस-आसनसोल पारसनाथ एक्सप्रेस में थर्ड और सेकंड एसी में जगह नहीं है तथा स्लीपर की प्रतीक्षा सूची 161 बताई गई है। छह नवंबर की वास्को-द-गामा-जसीडीह एक्सप्रेस में भी स्लीपर से सेकंड एसी तक बुकिंग भर चुकी है।
दिल्ली से धनबाद की यात्रा के विकल्प भी सीमित हो रहे हैं। नई दिल्ली से चलने वाली दोनों राजधानी ट्रेनों और शकूर बस्ती-धनबाद स्पेशल में सात नवंबर की सीटें भर गई हैं। धनबाद होकर बिहार जाने वाली ट्रेनों में भी मांग बढ़ी है। सात नवंबर की संबलपुर-गोरखपुर मौर्य एक्सप्रेस और छह नवंबर की रांची-गोरखपुर एक्सप्रेस में सीटें उपलब्ध नहीं हैं।
राउरकेला-जयनगर और चर्लपल्ली-दरभंगा जैसी सेवाओं में गिनी-चुनी सीटें बचने की जानकारी है। सात नवंबर की कोयंबटूर-धनबाद अमृत भारत की सभी सीटें भी भर चुकी हैं। वहीं, सूरत-मालदा टाउन एक्सप्रेस दो नवंबर को रद्द रहने के कारण सूरत से लौटने वाले यात्रियों को दूसरे विकल्प तलाशने होंगे।
नियमित ट्रेनों में जगह कम होने के बाद यात्रियों की निगाह दिल्ली, मुंबई, सूरत, सिकंदराबाद और बेंगलुरु से चलने वाली संभावित त्योहारी स्पेशल सेवाओं पर है। बेंगलुरु से धनबाद के लिए ट्रेन की मांग अधिक बताई गई है। अप्रैल तक चली धनबाद-यशवंतपुर स्पेशल अब बंद है; ऐसे में अतिरिक्त सेवाएं घोषित होने पर त्योहार में घर लौटने वालों को राहत मिल सकती है।