दीपावली से पहले रांची के बाजारों में खरीदारी तेज हो गई है। अपर बाजार, लालपुर, कांटा टोली, चुटिया और मोरहाबादी सहित प्रमुख बाजारों में सुबह से शाम तक ग्राहकों की आवाजाही देखी जा रही है। घरों की सजावट और लक्ष्मी-गणेश पूजा की तैयारियों के लिए लोग अपनी जरूरत के सामान खरीद रहे हैं।
इलेक्ट्रॉनिक झालरों और आधुनिक सजावटी वस्तुओं के बीच मिट्टी के पारंपरिक उत्पादों की मांग भी बनी हुई है। बाजार में सामान्य दीयों के अलावा रंगीन, फूलों के आकार वाले और अलग-अलग डिजाइन के दीपक उपलब्ध हैं। मिट्टी के घरौंदे और खिलौने भी बच्चों तथा परिवारों को आकर्षित कर रहे हैं।
सामान्य मिट्टी के दीये करीब एक रुपये प्रति पीस बेचे जा रहे हैं। रंगीन और डिजाइनर दीयों की कीमत आकार तथा बनावट के अनुसार अलग है। विक्रेताओं के मुताबिक, पिछले वर्ष की तुलना में दीयों के दाम लगभग 10 से 20 प्रतिशत बढ़े हैं। मिट्टी, ईंधन और मेहनत की लागत बढ़ने को इसका कारण बताया गया है।
दीपावली पर झारखंड की परंपरा से जुड़े करंज तेल की मांग भी बढ़ी है। स्थानीय बाजार में यह करीब 200 रुपये प्रति लीटर की दर से उपलब्ध है। ग्रामीण क्षेत्रों से सीमित मात्रा में आने के कारण इसकी उपलब्धता सामान्य तेल से कम रहती है। राज्य के कई पारंपरिक और आदिवासी समुदायों में करंज तेल से दीया जलाने की परंपरा प्रचलित है।
कारीगरों और विक्रेताओं के अनुसार, दीये बनाने लायक मिट्टी आसानी से नहीं मिलती और कई बार उसे दूर के क्षेत्रों से मंगाना पड़ता है। बारिश से दीयों को सुखाने और उत्पादन पर भी असर पड़ा है। इसके बावजूद त्योहार के अंतिम दिनों में बिक्री और बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।
बाजारों में लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियों, पूजा चौकी, धूप, रोली, कलावा, रंगोली के रंग, बंदनवार और फूलों की मालाओं की भी बिक्री हो रही है। कृत्रिम फूल, जूट के तोरण और रंगीन लाइटें भी उपलब्ध हैं। आधुनिक सजावट के बढ़ते चलन के बीच मिट्टी के दीयों और घरौंदों की मांग स्थानीय कारीगरों के उत्पादों को बाजार दे रही है।