दुमका चौकीदार भर्ती में तीन सेकंड की देरी पर अयोग्यता गलत, हाईकोर्ट ने नियुक्ति का दिया आदेश

झारखंड हाईकोर्ट ने दिव्यांग महिला अभ्यर्थी को चौकीदार पद के लिए योग्य मानते हुए राज्य सरकार को आठ सप्ताह में नियुक्ति पत्र जारी करने का निर्देश दिया है।

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दुमका चौकीदार भर्ती में दिव्यांग अभ्यर्थी की नियुक्ति पर झारखंड हाईकोर्ट का फैसला

झारखंड हाईकोर्ट ने दुमका की चौकीदार भर्ती में दिव्यांग महिला अभ्यर्थी को दौड़ पूरी करने में निर्धारित समय से तीन सेकंड अधिक लगने के आधार पर अयोग्य ठहराने को गलत माना है। अदालत ने अभ्यर्थी को नियुक्ति का हकदार घोषित करते हुए राज्य सरकार को आठ सप्ताह के भीतर चौकीदार पद का नियुक्ति पत्र जारी करने का निर्देश दिया।

मामला दुमका जिले में चौकीदार के 328 पदों की भर्ती प्रक्रिया से जुड़ा है। दिव्यांग श्रेणी की याचिकाकर्ता ने लिखित परीक्षा उत्तीर्ण की थी। इसके बाद हुई शारीरिक परीक्षा में उसे सामान्य अभ्यर्थियों के साथ दौड़ में शामिल किया गया। अभ्यर्थी ने दौड़ 10 मिनट तीन सेकंड में पूरी की, लेकिन तय समय से तीन सेकंड अधिक लगने के कारण चयन समिति ने उसे अयोग्य घोषित कर दिया था।

अदालत के समक्ष याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि शारीरिक परीक्षा के दौरान दिव्यांगता के अनुरूप न तो अतिरिक्त समय दिया गया और न कोई दूसरी विशेष सुविधा उपलब्ध कराई गई। पक्ष ने दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 की धारा 2 और धारा 20 का उल्लेख करते हुए उचित सुविधा उपलब्ध कराना राज्य की जिम्मेदारी बताया। अपने तर्क के समर्थन में उच्चतम न्यायालय के विकास कुमार बनाम संघ लोक सेवा आयोग मामले के निर्णय का भी संदर्भ दिया गया।

राज्य सरकार ने सुनवाई में कहा कि भर्ती के मौजूदा नियमों में दिव्यांग अभ्यर्थियों को दौड़ के लिए अलग से अतिरिक्त समय देने का प्रावधान नहीं है। हाईकोर्ट ने यह दलील स्वीकार नहीं की। अदालत ने स्पष्ट किया कि कोई प्रशासनिक नियम या सरकारी अधिसूचना संसद के बनाए कानून के प्रावधानों के विपरीत नहीं हो सकती।

सुनवाई के दौरान आरक्षित पदों की स्थिति भी अदालत के सामने रखी गई। उपलब्ध विवरण के अनुसार दुमका में दिव्यांग श्रेणी के लिए निर्धारित 13 पदों में से 11 अब भी रिक्त हैं। अदालत ने माना कि पद खाली होने और कानून के तहत उचित सुविधा की आवश्यकता के बावजूद केवल तीन सेकंड की देरी के कारण योग्य अभ्यर्थी को चयन से बाहर नहीं किया जा सकता।

इन तथ्यों और कानूनी प्रावधानों पर विचार करते हुए हाईकोर्ट ने महिला अभ्यर्थी को चौकीदार पद पर नियुक्ति का पात्र माना। राज्य सरकार को आदेश के अनुरूप आठ सप्ताह की समयसीमा में नियुक्ति पत्र जारी करना होगा। निर्णय ने भर्ती परीक्षाओं में दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए आवश्यक और परिस्थिति के अनुरूप सुविधा सुनिश्चित करने की वैधानिक जिम्मेदारी को रेखांकित किया है।