दुमका में नारियल खेती का पायलट प्रोजेक्ट, सभी 10 प्रखंडों में लगाए जाएंगे 10 हजार पौधे

कृषि विभाग दुमका के सभी 10 प्रखंडों के किसानों को नारियल खेती से जोड़ने की योजना बना रहा है। चयनित किसानों को पौधे निःशुल्क देने के साथ विशेषज्ञ प्रशिक्षण भी दिलाया जाएगा।

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दुमका में नारियल खेती के पायलट प्रोजेक्ट के लिए तैयार कृषि भूमि और पौधे

दुमका जिले में किसानों की आय के अतिरिक्त साधन विकसित करने के लिए नारियल की खेती शुरू करने की तैयारी है। प्रस्तावित पायलट प्रोजेक्ट के तहत जिले के सभी 10 प्रखंडों में कुल 10 हजार पौधे लगाने की योजना बनाई जा रही है। कृषि विभाग इसका खाका तैयार कर रहा है और इसे इसी वित्तीय वर्ष में लागू करने का लक्ष्य रखा गया है।

योजना के लिए किसानों को चिह्नित कर उनसे आवेदन लिए जाएंगे। तैयार प्रस्ताव के अनुसार, चयनित किसान को उसकी उपलब्ध जगह और जरूरत के आधार पर 10 से 300 पौधे तक दिए जा सकते हैं। किसान इन्हें खेत या बाड़ी के अलावा तालाब की मेड़ पर भी लगा सकेंगे। पहली बार योजना से जुड़ने वाले लाभुकों को पौधे निःशुल्क उपलब्ध कराने की तैयारी है।

जिला प्रशासन ने कृषि विभाग को नारियल खेती को बढ़ावा देने का निर्देश दिया है। विभाग ने नारियल विकास बोर्ड की मिशन इंटीग्रेटेड हॉर्टिकल्चर डेवलपमेंट योजना से किसानों को जोड़ने के लिए पत्राचार किया है। उन्नत किस्म के 10 हजार पौधे उपलब्ध कराने के लिए बोर्ड की पटना शाखा को मांग भी भेजी गई है।

पायलट प्रोजेक्ट में केवल पौधरोपण ही नहीं, बल्कि किसानों के प्रशिक्षण को भी शामिल किया गया है। नारियल विकास बोर्ड के विशेषज्ञ लाभुकों को वैज्ञानिक तरीके से खेती और बाग प्रबंधन की जानकारी देंगे। योजना में नारियल के साथ मिश्रित खेती को प्रोत्साहित करने का प्रावधान भी तैयार किया जा रहा है, ताकि खेत की उपलब्ध जगह का बेहतर उपयोग हो सके।

विभाग के अनुसार, प्रस्तावित उन्नत किस्मों में कई पौधे तीन से चार वर्ष में उपज देना शुरू कर सकते हैं। अलग-अलग समय पर फल विकसित होने के कारण लगभग 45 से 60 दिन के अंतराल पर तुड़ाई की व्यवस्था संभव बताई गई है। इससे किसानों के लिए एकमुश्त आय के बजाय नियमित अंतराल पर नकदी मिलने की संभावना देखी जा रही है।

योजना तैयार करते समय गर्मी के महीनों में सिंचाई की जरूरत को प्रमुख चुनौती माना गया है। इसके लिए बोरिंग, कुएं या ड्रिप सिंचाई जैसी सुविधा पहले से सुनिश्चित करने का सुझाव खाके में शामिल है। अब किसानों का चयन, आवेदनों की प्रक्रिया और पौधों की उपलब्धता पूरी होने के बाद प्रोजेक्ट को जमीन पर उतारा जाएगा।