दुमका में पंकज स्मृति महोत्सव, साहित्यकारों का सम्मान और तीन पुस्तकों का लोकार्पण

शिवपहाड़ के पंकज भवन में आयोजित स्मृति महोत्सव में साहित्यकारों और शिक्षाविदों ने आचार्य ज्योतीन्द्र प्रसाद झा ‘पंकज’ के साहित्यिक योगदान को याद किया।

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दुमका के शिवपहाड़ स्थित पंकज भवन में पंकज-गोष्ठी न्यास की ओर से आचार्य ज्योतीन्द्र प्रसाद झा ‘पंकज’ स्मृति महोत्सव आयोजित किया गया। कार्यक्रम में जिले के शिक्षाविदों और साहित्यकारों ने हिस्सा लिया। आयोजन के दौरान पुस्तक लोकार्पण, साहित्यिक परिचर्चा, सम्मान समारोह और काव्य गोष्ठी हुई।

समारोह में आचार्य पंकज के पूर्व छात्र और वरिष्ठ साहित्यकार शंभुनाथ मिस्त्री तथा डॉ. यू.एस. आनंद को आचार्य ज्योतीन्द्र प्रसाद झा ‘पंकज’ राष्ट्रीय साहित्य सम्मान प्रदान किया गया। इस मौके पर डॉ. अमर पंकज, शंभुनाथ मिस्त्री और डॉ. लक्ष्मण झा की लिखी पुस्तकों का लोकार्पण भी किया गया।

मुख्य अतिथि संताल परगना महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. खिरोधर प्रसाद यादव ने आचार्य पंकज के शैक्षणिक और साहित्यिक जीवन पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि आचार्य पंकज महाविद्यालय के संस्थापक प्राध्यापक और हिंदी विभाग के प्रथम अध्यक्ष थे। उन्होंने स्वतंत्रता सेनानी, रंगकर्मी, एकांकीकार, आलोचक और कवि के रूप में भी काम किया।

मुख्य वक्ता और एसकेएमयू के स्नातकोत्तर हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. विनय कुमार सिन्हा ने कहा कि आचार्य पंकज ने 1950 के दशक में दुमका में साहित्यिक गतिविधियों की मजबूत जमीन तैयार की थी। उन्होंने आचार्य पंकज की रचनाओं के पुनर्पाठ की आवश्यकता बताते हुए उनके साहित्य में झारखंड राज्य निर्माण की आकांक्षा दिखाई देने की बात कही।

सम्मान ग्रहण करने के बाद शंभुनाथ मिस्त्री ने अपने साहित्यिक जीवन में गुरु पंकज के योगदान को याद किया। डॉ. यू.एस. आनंद ने सम्मान को अपने जीवन की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। कार्यक्रम में अलग-अलग प्रतियोगिताओं के विजेता विद्यार्थियों को डॉ. नंदकिशोर झा स्मृति पुरस्कार और शक्ति देवी स्मृति पुरस्कार भी दिए गए।

उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता डॉ. चतुर्भुज नारायण मिश्र ने की। न्यास के अध्यक्ष डॉ. विश्वनाथ झा ने कार्यक्रम का संचालन किया, जबकि प्रबंधक कुणाल पंकज ने धन्यवाद ज्ञापन दिया। दूसरे सत्र में आयोजित काव्य गोष्ठी में 20 कवियों ने अपनी रचनाओं का पाठ किया।