दुमका के बंदरजोड़ी रोड स्थित एनईएलसी चर्च में रविवार को संताली भाषा की सोनोत बाइबिल के संशोधित संस्करण का विमोचन किया गया। करीब चार दशक बाद प्रकाशित इस संस्करण का पुनर्मुद्रण बाइबिल सोसाइटी ऑफ इंडिया ने कराया है। आयोजन को संताली में उपलब्ध धार्मिक साहित्य के संरक्षण और विकास की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास बताया गया।
कार्यक्रम में बाइबिल सोसाइटी ऑफ इंडिया के जनरल सेक्रेटरी रेवरेंड डॉ. कावितो जी. झिमो और असिस्टेंट डायरेक्टर ट्रांसलेशन रेवरेंड डॉ. सुब्रमणि शामिल हुए। नॉर्वेजियन बाइबल सोसाइटी के रेवरेंड ओयविंड, मिशन डायरेक्टर डॉ. बर्न्ट, एस्ट्रिड बर्न्ट और रांची बीएसआई के ऑक्जिलरी सेक्रेटरी रेवरेंड अल्फ्रेड तिग्गा की भी उपस्थिति रही।
आयोजन में साझा जानकारी के अनुसार, संताली भाषा में बाइबिल के प्रकाशन का इतिहास 1860 के दशक तक जाता है। बाइबिल सोसाइटी ऑफ इंडिया ने 1960 के दशक में भी इसका प्रकाशन किया था। इसके बाद लगभग 1985-86 में पाठ का संशोधन और पुनर्मुद्रण हुआ, लेकिन उसके बाद करीब 40 वर्षों तक कोई व्यापक संशोधित संस्करण सामने नहीं आया था।
नए संस्करण को तैयार करने की प्रक्रिया आठ से नौ वर्षों में पूरी हुई। इस दौरान पुराने पाठ की विस्तार से समीक्षा की गई और संताली भाषा के मौजूदा स्वरूप तथा आज प्रचलित शब्दों के अनुरूप आवश्यक बदलाव किए गए। संशोधन से जुड़े लोगों के अनुसार, पाठ को अधिक सहज और स्पष्ट बनाते समय उसके मूल संदेश को बनाए रखा गया है।
पुराने संस्करण में कुछ पुस्तकों और स्थानों के नाम अंग्रेजी या ग्रीक शैली के अनुसार लिखे गए थे। संशोधित पाठ में ऐसे नामों को संताली उच्चारण और भाषाई संरचना के अनुकूल किया गया है। उपलब्ध विवरण के मुताबिक, पहले के पाठ में मिली त्रुटियां सुधारी गई हैं और छूटे हुए छंदों को भी नए संस्करण में शामिल किया गया है।
विमोचन समारोह में एनईएलसी मॉडरेटर डॉ. इस्माइल मुर्मू, संतालिया काउंसिल ऑफ चर्चेस के जनरल सेक्रेटरी जॉय एरिक राज टुडू, डॉ. सुशील मरांडी, रेवरेंड रमेश चंद्र किस्कू और डॉ. तनल मुर्मू समेत कई प्रतिनिधि उपस्थित रहे। आयोजकों का कहना है कि संशोधित संस्करण से संताली पाठकों को अधिक परिष्कृत और वर्तमान भाषा के अनुरूप धार्मिक पाठ उपलब्ध होगा।