दुमका विस्फोटक बरामदगी मामले में ट्रक मालिक की जमानत याचिका खारिज

झारखंड हाईकोर्ट ने काठीकुंड थाना क्षेत्र से जुड़े विस्फोटक बरामदगी मामले में दस वर्ष की सजा पाए ट्रक मालिक सुल्तान वाहिद को जमानत देने से इनकार कर दिया।

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झारखंड हाईकोर्ट में दुमका के विस्फोटक बरामदगी मामले की सुनवाई

रांची स्थित झारखंड हाईकोर्ट ने दुमका के काठीकुंड थाना क्षेत्र से जुड़े विस्फोटक बरामदगी मामले में दोषी ट्रक मालिक सुल्तान वाहिद की जमानत याचिका खारिज कर दी है। उसे निचली अदालत ने दस वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई थी। सजा के खिलाफ अपील के साथ उसकी ओर से जमानत की मांग की गई थी।

जस्टिस आर मुखोपाध्याय और जस्टिस एके राय की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की। अदालत ने ट्रक मालिक की इस दलील को स्वीकार नहीं किया कि उसे वाहन में विस्फोटक सामग्री रखे होने की जानकारी नहीं थी। पीठ ने बरामद सामग्री की मात्रा को देखते हुए इस तर्क पर विश्वास करना मुश्किल बताया।

मामले में पुलिस ने एक ट्रक रोककर उसकी तलाशी ली थी। उपलब्ध विवरण के अनुसार, वाहन से बड़ी संख्या में डेटोनेटर और अन्य विस्फोटक पदार्थ मिले थे। ट्रक के चालक और खलासी को मौके पर पकड़ा गया था। यह प्रकरण काठीकुंड थाने से संबंधित है।

अपीलकर्ता की ओर से कहा गया कि घटना के समय वह ट्रक में मौजूद नहीं था और वाहन का मालिक होने के कारण ही उसे आरोपी बनाया गया। उसका पक्ष था कि उसे ट्रक के जरिए विस्फोटक सामग्री ले जाए जाने की जानकारी नहीं थी। खंडपीठ ने बरामदगी से जुड़े तथ्यों के आधार पर यह सफाई अस्वीकार कर दी।

निचली अदालत ने सुल्तान वाहिद को विस्फोटक पदार्थ अधिनियम की धारा 4(आई) और 5(ए) के तहत दोषी ठहराया था। दोनों धाराओं में उसे दस-दस वर्ष के कठोर कारावास और दस-दस हजार रुपये जुर्माने की सजा दी गई थी। हाईकोर्ट का मौजूदा आदेश जमानत याचिका तक सीमित है।

अदालत के निर्णय के बाद दोषसिद्धि के विरुद्ध दायर अपील के साथ मांगी गई अंतरिम राहत फिलहाल नहीं मिली है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि ट्रक से भारी मात्रा में विस्फोटक मिलने की परिस्थिति में मालिक की अनभिज्ञता वाली दलील जमानत देने के लिए स्वीकार्य आधार नहीं है।