देवघर के हर्षित नमन को ब्रेन-कंप्यूटर तकनीक से जुड़े शोध के लिए IEEE CICC-2026 का आउटस्टैंडिंग स्टूडेंट पेपर अवार्ड मिला है। पर्ड्यू यूनिवर्सिटी में इलेक्ट्रिकल एंड कंप्यूटर इंजीनियरिंग के पीएचडी शोधार्थी हर्षित ने अपनी टीम के साथ ऐसी चिप विकसित की है, जो बेहद कम ऊर्जा खर्च कर मस्तिष्क के भीतर से बड़ी मात्रा में डेटा बाहर भेजने में मदद कर सकती है।
हर्षित यह शोध पर्ड्यू यूनिवर्सिटी की स्पार्क लैब में प्रोफेसर श्रेयास सेन के मार्गदर्शन में कर रहे हैं। उनका काम ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस, न्यूरल इम्प्लांट और अन्य चिकित्सा उपकरणों को अधिक सक्षम बनाने की दिशा से जुड़ा है। CICC को इंटीग्रेटेड सर्किट और चिप डिजाइन के प्रमुख अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में गिना जाता है।
शोध में मस्तिष्क के ऊतकों से गुजरने वाले विद्युत संकेतों के व्यवहार पर ध्यान दिया गया। टीम ने पाया कि ऊतकों के कारण संकेत की ताकत काफी घट सकती है, जबकि उसका समय संबंधी पैटर्न लगभग सुरक्षित रहता है। इसी आधार पर ऐसा रिसीवर तैयार किया गया, जो वोल्टेज के स्तर के बजाय पल्स के समय और अवधि में दर्ज सूचना को पढ़ता है।
यह चिप 16 नैनोमीटर फिनफेट तकनीक पर बनाई गई है। परीक्षण के दौरान रिसीवर ने करीब 10 सेंटीमीटर के टिश्यू मॉडल के पार 80 मेगाबिट प्रति सेकंड की डेटा दर प्राप्त की। इस दौरान ऊर्जा खपत 53.6 माइक्रोवाट और ऊर्जा दक्षता 0.67 पिकोजूल प्रति बिट दर्ज की गई।
कम ऊर्जा खपत शरीर या मस्तिष्क में लगाए जाने वाले इलेक्ट्रॉनिक इम्प्लांट के लिए अहम मानी जाती है, क्योंकि अधिक बिजली खर्च होने पर गर्मी पैदा होने का जोखिम रहता है। मस्तिष्क में लगे छोटे उपकरण न्यूरॉन्स से डेटा रिकॉर्ड कर सकते हैं, लेकिन उस डेटा को तेजी से शरीर के बाहर भेजना एक बड़ी तकनीकी चुनौती है। यह शोध उसी समस्या के समाधान की दिशा में किया गया है।
इस तकनीक का भावी उपयोग बोलने या चलने-फिरने में सहायता देने वाले न्यूरो-प्रोस्थेटिक उपकरणों, मस्तिष्क संबंधी शोध तथा पार्किंसंस और एपिलेप्सी से जुड़ी क्लोज्ड-लूप न्यूरोमॉड्यूलेशन प्रणालियों में हो सकता है। हर्षित ने 2022 में बीआईटी मेसरा से इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग में बीटेक किया था। उनका मौजूदा शोध एनालॉग एवं मिक्स्ड-सिग्नल इंटीग्रेटेड सर्किट, ऊर्जा-कुशल कंप्यूटिंग और बायोमेडिकल कम्युनिकेशन सिस्टम पर केंद्रित है।