देवघर में ग्रामीण महिलाओं और युवाओं को रोजगार से जोड़ने के उद्देश्य से कौशल प्रशिक्षण दिया जा रहा है। जिला प्रशासन और भारतीय स्टेट बैंक के सहयोग से संचालित प्रशिक्षण शिविर में चयनित प्रतिभागियों को कृषि, पशुपालन, उत्पाद निर्माण और तकनीक से जुड़े काम सिखाए जा रहे हैं। यह प्रशिक्षण ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान यानी आरसेटी में चल रहा है।
केंद्र में अलग-अलग समय पर जरूरत और चयन के आधार पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। फिलहाल महिलाओं और युवाओं को बकरी पालन सहित आजीविका के विभिन्न क्षेत्रों की व्यावहारिक जानकारी दी जा रही है। प्रशिक्षण ले रहीं उषा देवी के अनुसार, 15 दिनों के निशुल्क कार्यक्रम में उन्हें बकरी पालन की ऐसी उपयोगी जानकारियां मिली हैं जो ग्रामीण स्तर पर आसानी से उपलब्ध नहीं हो पातीं।
प्रशिक्षण में शामिल युवा बद्री यादव का कहना है कि कार्यक्रम से उनका आत्मविश्वास बढ़ा है। उनका मानना है कि सीखे गए कौशल के आधार पर वे बैंक ऋण लेकर काम शुरू कर सकते हैं और उपलब्ध धन का बेहतर उपयोग कर सकते हैं। संस्थान प्रशिक्षण पूरा करने वाले प्रतिभागियों को ऋण प्राप्त करने की प्रक्रिया में सहायता भी देता है।
आरसेटी में कृषि और उत्पाद निर्माण के साथ डिजिटल कौशल पर भी ध्यान दिया जा रहा है। ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों की महिलाओं को कंप्यूटर ऑपरेटर का प्रशिक्षण दिया जाता है, ताकि वे संस्थानों, कंपनियों या कंप्यूटर केंद्रों में काम के अवसर तलाश सकें। प्रशिक्षक राकेश गर्ग के मुताबिक, डिजिटल जानकारी की कमी के कारण कई ग्रामीण युवा रोजगार संबंधी सूचनाओं तक नहीं पहुंच पाते।
केंद्र के प्रभारी मिथिलेश कुमार के अनुसार, प्रशिक्षण हासिल करने के बाद अनेक महिलाएं और युवा स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़े हैं। यहां खेती की तकनीक, पशुपालन, अगरबत्ती निर्माण, लकड़ी के आभूषण और अन्य डिजाइनिंग उत्पाद बनाने से संबंधित जानकारी भी दी जाती है। इसका उद्देश्य प्रतिभागियों के मौजूदा हुनर को आय के साधन में बदलने योग्य बनाना है।
आरसेटी की निदेशक नीलम संजीव ने बताया कि प्रशिक्षण के बाद पात्र प्रतिभागियों को ऋण दिलाने में सहयोग किया जाता है। केंद्र में लोगों का चयन जिला प्रशासन के निर्देश पर किया जाता है और संस्था के अध्यक्ष जिले के उपायुक्त होते हैं। यह पहल केंद्र सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय के तहत क्रियान्वित की जा रही है।