झारखंड हाईकोर्ट ने 23 विधानसभा कर्मियों की प्रोन्नति बहाल रखी, सचिवालय का आदेश रद्द

हाईकोर्ट ने 97 अंकों की परीक्षा को आधार बनाकर 23 कर्मियों की प्रोन्नति रद्द करने की कार्रवाई को मनमाना और अवैध माना। आठ सप्ताह में परिणामी लाभ देने का निर्देश दिया गया है।

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रांची स्थित झारखंड हाईकोर्ट का भवन, जहां विधानसभा कर्मियों की प्रोन्नति पर फैसला सुनाया गया

रांची में झारखंड हाईकोर्ट ने विधानसभा सचिवालय के 23 चतुर्थ वर्गीय कर्मचारियों को राहत देते हुए जूनियर सेक्रेटेरिएट असिस्टेंट पद पर उनकी प्रोन्नति जारी रखने का आदेश दिया है। जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने परीक्षा 100 के बजाय 97 अंकों की होने के आधार पर पूरी प्रक्रिया समाप्त करने संबंधी सचिवालय के फैसले को मनमाना और अवैध माना।

विधानसभा सचिवालय ने प्रोन्नति के लिए 29 अगस्त 2025 को सूचना जारी की थी। प्रतियोगिता परीक्षा 14 सितंबर को हुई और 16 सितंबर को परिणाम घोषित किया गया। सफल कर्मचारियों को तीन अक्टूबर 2025 को प्रोन्नति दी गई थी। अधिकांश कर्मचारियों ने उसी दिन नए पद पर योगदान देकर काम भी शुरू कर दिया था।

इसके बाद सचिवालय के उप सचिव ने 13 अक्टूबर 2025 को तकनीकी कारण बताते हुए परीक्षा रद्द कर दी। कर्मचारियों को उनके पुराने ग्रेड के पदों पर वापस भेज दिया गया। सचिवालय का पक्ष था कि परीक्षा 100 अंकों की होनी थी, लेकिन तैयार प्रश्नपत्र कुल 97 अंकों का था। इसी त्रुटि के आधार पर पूरी परीक्षा प्रक्रिया निरस्त की गई थी।

कर्मचारियों ने अदालत में कहा कि 97 अंकों वाली परीक्षा सभी अभ्यर्थियों के लिए एक समान थी, इसलिए किसी को अलग लाभ या नुकसान नहीं हुआ। मामले में धांधली या अनुचित साधन अपनाने का भी कोई आरोप नहीं था। अदालत ने पाया कि नियमों में लिखित परीक्षा के कुल अंकों की कोई निश्चित संख्या निर्धारित नहीं थी और तकनीकी कमी विभाग की ओर से हुई थी।

हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि परिणाम घोषित होने, प्रोन्नति आदेश जारी होने और योगदान स्वीकार किए जाने के बाद पूरी प्रक्रिया रद्द करना उचित नहीं था। प्रोन्नत कर्मचारियों को पुराने पद पर भेजना उनकी रैंक घटाने के समान था। ऐसी कार्रवाई से पहले उन्हें नोटिस, अपना पक्ष रखने और सुनवाई का अवसर मिलना चाहिए था, लेकिन यह प्रक्रिया नहीं अपनाई गई।

अदालत ने 13 अक्टूबर 2025 का परीक्षा रद्द करने वाला आदेश निरस्त कर अधिकारियों को आठ सप्ताह के भीतर सभी परिणामी लाभ देने का औपचारिक आदेश जारी करने को कहा है। 23 याचिकाकर्ताओं की सेवा तीन अक्टूबर 2025 से नए पद पर निरंतर मानी जाएगी। स्वीकृत अवकाश के कारण 21 अक्टूबर को योगदान देने वाले एक कर्मचारी को उसी तारीख से प्रोन्नति लाभ मिलेगा।