देवघर के पैरा-एथलीट रोहित कुमार ने सरकार और जिला प्रशासन से खेल कोटे के तहत उपयुक्त नौकरी देने की मांग की है। गोला फेंक, कुश्ती और ताइक्वांडो की प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले चुके रोहित फिलहाल अपनी आजीविका के लिए देवघर में चाय की दुकान चला रहे हैं। उनका कहना है कि नियमित रोजगार मिलने पर वे आर्थिक चिंताओं से उबरकर प्रशिक्षण और आगामी प्रतियोगिताओं की तैयारी पर अधिक ध्यान दे सकेंगे।
रोहित के अनुसार, उन्होंने मई 2026 में बेंगलुरु में आयोजित आठवीं इंडियन ओपन पैरा एथलेटिक्स इंटरनेशनल चैंपियनशिप में भारत का प्रतिनिधित्व किया था। शॉटपुट की एफ-36 श्रेणी के फाइनल में उन्होंने 9.64 मीटर का थ्रो करते हुए रजत पदक हासिल किया। उनकी ओर से बताई गई यह उपलब्धि सीमित संसाधनों के बीच जारी खेल अभ्यास और प्रतिस्पर्धी भागीदारी को रेखांकित करती है।
उन्होंने ग्वालियर में आयोजित सीपीएसएफआई सेंट्रल जोन सीपी फुटबॉल एवं एथलेटिक्स चैंपियनशिप 2026 की शॉटपुट स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतने की जानकारी भी दी है। इसके अलावा जमशेदपुर में हुई 25वीं राज्य पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में भी उनके खाते में स्वर्ण पदक आया। रोहित चंडीगढ़ की राष्ट्रीय ताइक्वांडो प्रतियोगिता और रांची की राज्य कुश्ती चैंपियनशिप में भी पदक जीत चुके हैं।
खेल उपलब्धियों के लिए रोहित को 30 अगस्त 2026 को पटना में आयोजित बिहार स्पोर्ट्स अवार्ड्स में ‘बेस्ट इंटरनेशनल एथलीट’ सम्मान और प्रशंसा पत्र प्रदान किया गया था। इस सम्मान के बाद उनकी उपलब्धियां फिर चर्चा में आईं, लेकिन उनके सामने नियमित आय और खेल की तैयारी को साथ लेकर चलने की चुनौती बनी हुई है।
रोहित ने सोशल मीडिया के माध्यम से रोजगार की अपील करते हुए कहा है कि खिलाड़ियों को अभ्यास के साथ बेहतर उपकरण, पौष्टिक आहार और आर्थिक सुरक्षा की भी आवश्यकता होती है। उनका मानना है कि स्थायी नौकरी मिलने से प्रशिक्षण की निरंतरता बनाए रखना आसान होगा और वे राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर की अगली प्रतियोगिताओं के लिए अधिक व्यवस्थित तैयारी कर पाएंगे। अब उनकी अपेक्षा है कि सरकार या प्रशासन खेल कोटे के अंतर्गत उनकी मांग पर विचार करे।