देवघर जिले में जनवितरण प्रणाली के तहत राशन मिलने में लगातार हो रही देरी कार्डधारियों की परेशानी बढ़ा रही है। लाभुकों को खाद्यान्न लेने के लिए हर महीने पीडीएस दुकानों के औसतन तीन से चार चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। दुकान पर पहुंचने के बाद उन्हें अक्सर आपूर्ति नहीं आने की जानकारी देकर लौटाया जा रहा है।
उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय खाद्य निगम से खाद्यान्न नियमित रूप से झारखंड राज्य खाद्य एवं असैनिक आपूर्ति निगम के गोदामों तक पहुंच रहा है। इसके बावजूद पीडीएस दुकानों तक समय पर अनाज नहीं पहुंच पाने के कारण वितरण प्रभावित हो रहा है। देरी की यह स्थिति अगस्त में भी बनी रही और सितंबर में भी सुधार नहीं दिखा है।
अगस्त महीने का खाद्यान्न जिले की विभिन्न दुकानों पर तीसरे सप्ताह से बांटा जाना शुरू हुआ था। महीने के अंतिम दिन तक करीब 80 प्रतिशत वितरण ही पूरा हो सका। इसके बाद विभाग ने राशन बांटने की अंतिम तारीख बढ़ाकर पांच सितंबर कर दी, लेकिन आपूर्ति समय पर नहीं पहुंचने से हजारों कार्डधारी अगस्त का अनाज नहीं ले सके।
सितंबर शुरू होने के बाद भी जिले की अधिकांश पीडीएस दुकानों में इस महीने के खाद्यान्न का वितरण आरंभ नहीं होने की बात सामने आई है। देवघर में 900 से अधिक पीडीएस दुकानें संचालित हैं। इनसे विभिन्न श्रेणियों के 2.40 लाख से ज्यादा कार्डधारी जुड़े हुए हैं, इसलिए वितरण में देरी का असर बड़ी संख्या में परिवारों पर पड़ रहा है।
जिला आपूर्ति पदाधिकारी प्रीतिलता किस्कू के मुताबिक, सभी डोर स्टेप डिलीवरी अभिकर्ताओं को समय पर खाद्यान्न पहुंचाने का निर्देश दिया जाता है। उन्होंने कुछ आपूर्ति वाहनों में जीपीएस प्रणाली नहीं लगे होने को परेशानी की एक वजह बताया है। विभाग ने कई महीने पहले सभी संबंधित वाहनों में जीपीएस लगाने का निर्देश दिया था, लेकिन यह व्यवस्था अब तक प्रत्येक वाहन में लागू नहीं हो सकी है।
राशन वितरण की समयबद्धता गोदाम से दुकानों तक खाद्यान्न पहुंचाने वाली व्यवस्था पर निर्भर है। मौजूदा स्थिति में कार्डधारियों को बार-बार दुकान जाना पड़ रहा है, फिर भी उन्हें तय अवधि में अनाज मिलने की निश्चितता नहीं है। अगस्त का वितरण अधूरा रहने और सितंबर की शुरुआत में भी आपूर्ति पिछड़ने से व्यवस्था को नियमित करने की जरूरत सामने आई है।