धनबाद की हर पंचायत में स्वास्थ्य उपकेंद्र की योजना, बनेंगे 419 आंगनबाड़ी भवन और 140 स्कूल

डीएमएफटी की योजनाओं के तहत धनबाद में स्वास्थ्य, शिक्षा और पेयजल को प्राथमिकता दी गई है। हर पंचायत में क्रियाशील स्वास्थ्य उपकेंद्र स्थापित करने के साथ 419 आंगनबाड़ी भवन बनाए जा रहे हैं।

3 मिनट पढ़ें 5 बार पढ़ी गई
धनबाद में स्वास्थ्य उपकेंद्र, आंगनबाड़ी भवन और स्कूलों के विकास की योजना

धनबाद जिले में जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट की राशि से स्वास्थ्य, शिक्षा, पोषण और पेयजल से जुड़ी सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा। प्रत्येक पंचायत में कम से कम एक क्रियाशील स्वास्थ्य उपकेंद्र स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ 419 नए आंगनबाड़ी भवन बनाए जा रहे हैं और 140 विद्यालयों का विकास सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस की तर्ज पर शुरू किया गया है।

उपायुक्त आदित्य रंजन की अध्यक्षता में हुई बैठक में उप विकास आयुक्त सन्नी राज ने योजनाओं और बजट की प्राथमिकताएं बताईं। कुल बजट की 70 प्रतिशत राशि स्वास्थ्य, शिक्षा और पेयजल जैसे उच्च प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में खर्च करने का प्रावधान है। शेष 30 प्रतिशत राशि सड़क, ऊर्जा और दूसरी आधारभूत संरचनाओं को मजबूत करने में लगाई जाएगी।

शिक्षा क्षेत्र में 140 विद्यालयों के विकास के अलावा मुख्यमंत्री उत्कृष्ट विद्यालय और पीएम-श्री की तर्ज पर 391 सरकारी स्कूलों के नवीनीकरण की योजना है। अब तक 87 विद्यालयों में आधुनिक फर्नीचर, स्मार्ट क्लास, कंप्यूटर, पुस्तकालय और खेल सामग्री उपलब्ध कराई गई है। अन्य 413 स्कूलों में भी ऐसी व्यवस्था प्रस्तावित है। जिले के 1,558 स्कूलों के विद्यार्थियों को थाली और गिलास दिए गए हैं तथा आठ प्रखंडों के 2,863 शिक्षकों को प्रशिक्षण मिला है।

स्वास्थ्य सेवाओं के तहत सदर अस्पताल की ओपीडी पंजीकरण प्रणाली का आधुनिकीकरण किया गया है। वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगों के लिए अलग काउंटर तथा सखी हेल्प डेस्क उपलब्ध है। अस्पताल में आधुनिक आई-ओटी के जरिए 415 से अधिक मरीजों के निःशुल्क मोतियाबिंद ऑपरेशन किए गए हैं। यहां 12 बेड की मदर एंड न्यूबॉर्न केयर यूनिट और 14 बेड का कुपोषण उपचार केंद्र भी संचालित है, जबकि तोपचांची में डायलिसिस यूनिट शुरू की गई है।

जिले में 201 आंगनबाड़ी केंद्रों को पहले ही नए भवन मिल चुके हैं। वित्तीय वर्ष 2026-27 के अंत तक 82.5 प्रतिशत केंद्रों को पक्के भवनों में संचालित करने के लक्ष्य के साथ 419 और भवन बनाए जा रहे हैं। इनमें बाघमारा में 113, झरिया में 79, धनबाद में 75, निरसा में 65, सिंदरी में 59 और टुंडी में 28 भवन शामिल हैं। इन्हें पेयजल, शौचालय और बिजली की सुविधा वाले मॉडल प्री-नर्सरी केंद्रों के रूप में विकसित किया जाएगा।

पेयजल व्यवस्था के लिए 7,901 ट्यूबवेलों का नियमित रखरखाव किया जा रहा है और 97 उच्च क्षमता वाले ट्यूबवेल लगाए गए हैं। जल संरक्षण की 793 तालाब योजनाओं में 205 को स्वीकृति मिली है। उपायुक्त ने निर्माण कार्यों में गड़बड़ी की शिकायत मिलने पर दो से तीन दिनों के भीतर जांच दल भेजने का निर्देश दिया है और कहा है कि अगले तीन से छह महीनों में योजनाओं के परिणाम दिखाई देने लगेंगे।