धनबाद में दुर्गापूजा के दौरान पंडालों और मेलों की रौनक के साथ शहर की बहुभाषी पहचान भी सामने आ रही है। अलग-अलग इलाकों से दर्शन के लिए निकल रहे लोगों की बातचीत में बांग्ला, खोरठा और मगही सुनाई दे रही है। सड़कों पर बढ़ी भीड़ और उत्साह के बीच कई प्रमुख पूजा स्थलों तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को पैदल चलना पड़ रहा है।
झारखंड मैदान तक मुख्य मार्गों से वाहन लेकर पहुंचना मुश्किल बताया गया है। यहां जाने वाले श्रद्धालुओं को हीरापुर हटिया मोड़ के पास से पैदल आगे बढ़ना होगा। आसपास के कई पंडाल देखने की योजना हो तो जिला परिषद क्षेत्र से यात्रा शुरू की जा सकती है।
जिला परिषद स्थित बंगाली कल्याण समिति के पंडाल से आगे हीरापुर पार्क में बंगाली वेलफेयर सोसाइटी का किताबों की थीम वाला पंडाल है। इसके बाद हीरापुर हरि मंदिर और माडा क्लब के पूजा स्थलों से होते हुए झारखंड मैदान पहुंचा जा सकता है। इस क्रम में कम दूरी के भीतर कई पंडाल देखने का अवसर मिलता है।
धनबाद स्टेशन से सटी न्यू स्टेशन कॉलोनी के पंडाल तक आने वाले लोग स्टेशन तक वाहन से पहुंच सकते हैं। वहां से फुट ओवरब्रिज के रास्ते आगे जाना होगा। इसके बाद पुराना बाजार रेलवे इंस्टीट्यूट रोड से टेंपल रोड, तेतुलतल्ला और पुराना बाजार डीएवी मैदान के आसपास के पूजा स्थलों की ओर बढ़ा जा सकता है। इसी मार्ग से बैंक मोड़ के पंडालों तक भी पहुंचने का विकल्प है।
स्टीलगेट पूजा पंडाल की ओर जाने वाले वाहनों को कार्मिक नगर मोड़ तक ही जाने की सुविधा बताई गई है। इसके बाद करीब एक किलोमीटर की दूरी पैदल तय करनी होगी। ऐसे में बच्चों और बुजुर्गों के साथ निकलने वाले परिवारों के लिए पैदल दूरी को ध्यान में रखकर यात्रा की योजना बनाना उपयोगी रहेगा।
शाम के समय गोविंदपुर की ओर जाने के लिए बरवाअड्डा के मेमको मोड़ वाला रास्ता चुना जा सकता है। हीरापुर और दामोदरपुर होकर जाने वाला मार्ग भी उपलब्ध है, जिस पर यातायात का दबाव नहीं होने की जानकारी दी गई है। मेले की भीड़ के बीच ये मार्ग पंडाल भ्रमण और आवाजाही को व्यवस्थित करने में मदद कर सकते हैं।