धनबाद के दुर्गा पूजा पंडालों में पर्यावरण और आदिवासी संस्कृति की झलक

धनबाद में दुर्गोत्सव के लिए तैयार अलग-अलग थीम वाले पंडालों में प्राकृतिक सामग्री, पौधों, आदिवासी जीवनशैली और स्थानीय कला को प्रमुखता दी गई है।

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धनबाद में अलग-अलग थीम पर सजाया गया दुर्गा पूजा पंडाल

धनबाद में दुर्गोत्सव के लिए तैयार पूजा पंडाल इस बार कला, पर्यावरण संरक्षण और आदिवासी संस्कृति के अलग-अलग रूप सामने ला रहे हैं। सरायढेला, हीरापुर, न्यू स्टेशन रेलवे कॉलोनी, धनसार और भूली में पूजा समितियों ने विशिष्ट विषयों के आधार पर पंडालों को सजाया है। कहीं मोर और पारंपरिक जीवनशैली दिखाई गई है तो कहीं पौधों और प्राकृतिक सामग्री का इस्तेमाल किया गया है।

सरायढेला स्टील गेट के पंडाल का बाहरी हिस्सा तीन विशाल मोरों से सजाया गया है। इसके अंदर आदिवासी समाज के रहन-सहन और संस्कृति को दर्शाया गया है। समिति से जुड़ी जानकारी के अनुसार, यहां 1989 से दुर्गा पूजा हो रही है। मेदिनीपुर के कारीगरों ने बांस को बारीकी से छीलकर मोर की आकृतियां तैयार की हैं और निर्माण पर करीब 20 लाख रुपये खर्च हुए हैं।

हीरापुर के झारखंड मैदान में अंडमान-निकोबार के आदिवासी शीश महल की थीम अपनाई गई है। पंडाल के भीतर और बाहर झारखंडी आदिवासी संस्कृति की झलक रखी गई है। इसके निर्माण में हुगला पत्ता, बांस की पट्टी, ताड़ पत्ता, चटाई, जूट और नारियल की माला जैसी प्राकृतिक सामग्रियां लगाई गई हैं। यहां आदिवासी घर, त्योहार, लोकनृत्य और जीवनशैली को प्रदर्शित किया गया है। निर्माण की लागत करीब 14 लाख रुपये बताई गई है।

न्यू स्टेशन रेलवे कॉलोनी का पंडाल दो अलग विषयों को जोड़ता है। इसके बाहरी हिस्से में आदिवासी संस्कृति दिखाई गई है, जबकि अंदर की सजावट गुपचुप की थीम पर की गई है। बंगाल के कारीगरों द्वारा तैयार इस पंडाल पर करीब साढ़े सात लाख रुपये खर्च किए जा रहे हैं।

धनसार के लक्ष्मी नारायण विद्या मंदिर परिसर में पर्यावरण संरक्षण को केंद्र में रखकर पंडाल बनाया गया है। इसे करीब एक लाख पौधों से सजाया गया है, जिनमें एरेका पाम, तुलसी, मनी प्लांट, स्नेक प्लांट और स्पाइडर प्लांट शामिल हैं। करीब 50 फीट ऊंचे पंडाल के बाहरी हिस्से में भगवान जगन्नाथ की आकृति बनाई गई है। इसके निर्माण में 40 हजार बांस के टुकड़ों के उपयोग की जानकारी दी गई है तथा प्लास्टिक और कपड़े का इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है।

भूली डी ब्लॉक के अस्पताल ग्राउंड में कालचक्र थीम पर 55 फीट चौड़ा और 45 फीट ऊंचा पंडाल बनाया गया है। बांस और लोहे की छड़ों से तैयार संरचना को फोम, फाइबर और प्लाईवुड की नक्काशीदार कलाकृतियों से सजाया गया है। इन विविध परिकल्पनाओं ने धनबाद के दुर्गोत्सव में पारंपरिक पूजा के साथ शिल्प, संस्कृति और पर्यावरण का साझा स्वर जोड़ा है।