धनबाद जिले में निजी पैथोलॉजी और डायग्नोस्टिक केंद्रों की कार्यप्रणाली की जांच की तैयारी है। स्वास्थ्य विभाग को सूचना मिली है कि कुछ पैथोलॉजिस्ट एक साथ कई जांच केंद्रों से जुड़े हैं। प्रस्तावित जांच में यह देखा जाएगा कि संबंधित विशेषज्ञ अलग-अलग संस्थानों में वास्तव में कितना समय देते हैं और जांच रिपोर्टों की समीक्षा किस तरह की जाती है।
यह पहल कतरास के श्यामडीह स्थित एक डायग्नोस्टिक केंद्र में सामने आई अनियमितताओं के बाद की जा रही है। विभाग का ध्यान अब जिले के अन्य पंजीकृत केंद्रों की व्यवस्था पर भी है। अधिकारियों के अनुसार, कई केंद्रों का पंजीकरण विशेषज्ञों के नाम और उनकी सहमति के आधार पर कराया गया है; इसलिए उनकी वास्तविक उपलब्धता की पुष्टि जरूरी मानी गई है।
पैथोलॉजी केंद्रों में नमूनों की जांच तकनीशियन कर सकते हैं, लेकिन रिपोर्ट की समीक्षा और उसकी प्रामाणिकता सुनिश्चित करने में पैथोलॉजिस्ट की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। विभाग यह पता लगाएगा कि एक विशेषज्ञ कितने केंद्रों से संबद्ध है और क्या वह प्रत्येक संस्थान की रिपोर्टों की नियमित समीक्षा कर रहा है।
प्रभारी सिविल सर्जन डॉ. संजीव कुमार के अनुसार, सभी पंजीकृत पैथोलॉजी केंद्रों की सूची तैयार की जाएगी। इसके साथ उनसे जुड़े पैथोलॉजिस्टों का ब्योरा, संस्थानों में उनकी उपलब्धता और काम करने की व्यवस्था जांची जाएगी। उन्होंने कई स्थानों पर एक साथ निगरानी को व्यावहारिकता के आधार पर परखने की बात कही है।
जांच के दौरान यह भी देखा जाएगा कि रिपोर्टों पर विशेषज्ञों के नाम और हस्ताक्षर का इस्तेमाल उनकी वास्तविक समीक्षा के बाद हो रहा है या नहीं। यदि नियमों का उल्लंघन सामने आता है, तो संबंधित केंद्रों के पंजीकरण पर पुनर्विचार किया जा सकता है और नियमानुसार कार्रवाई भी संभव है। हालांकि, अंतिम निर्णय जांच पूरी होने के बाद ही लिया जाएगा।
स्वास्थ्य विभाग एमटीपी अधिनियम के अनुपालन की भी समीक्षा करेगा। अधिकारियों के मुताबिक संबंधित पंजीकृत संस्थानों को प्रत्येक महीने की पांच तारीख तक निर्धारित फॉर्म सिविल सर्जन कार्यालय में जमा करना होता है। अब यह जांचा जाएगा कि जरूरी दस्तावेज और रिपोर्ट समय पर दिए जा रहे हैं या नहीं।