गुमला के नगर भवन में शनिवार को दिव्यांगजनों की समस्याओं के त्वरित निपटारे और योजनाओं की जानकारी देने के लिए एक दिवसीय चलंत न्यायालय-सह-जागरूकता शिविर आयोजित किया गया। आयोजन महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग और राज्य निःशक्तता आयुक्त कार्यालय के संयुक्त तत्वावधान में हुआ। राज्य निःशक्तता आयुक्त कीर्तिश्री, उपायुक्त दिलेश्वर महतो, उप विकास आयुक्त अनिमेष रंजन और सिविल सर्जन डॉ. शंभूनाथ चौधरी ने कार्यक्रम का उद्घाटन किया।
शिविर में समाज कल्याण, स्वास्थ्य, शिक्षा, ग्रामीण विकास, पेंशन, कल्याण, निबंधन, श्रम नियोजन, जेएसएलपीएस और आपूर्ति सहित कई विभागों के स्टॉल लगाए गए। दिव्यांगजनों ने अपनी समस्याएं सीधे संबंधित अधिकारियों के सामने रखीं। इस दौरान दिव्यांगता प्रमाणपत्र से जुड़ी विसंगतियों के समाधान के साथ पेंशन स्वीकृति पत्र और सहायक उपकरण भी वितरित किए गए।
राज्य निःशक्तता आयुक्त ने बताया कि दिव्यांगजनों के विधिक और संवैधानिक अधिकारों के संरक्षण के लिए विशेष कोषांग बनाया गया है। उनके अनुसार, राज्य स्तर पर पहुंचने वाले अधिकतर मामलों का समाधान जिले में ही संभव है। इसी उद्देश्य से चलंत न्यायालय के माध्यम से सेवाएं स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कराई जा रही हैं, ताकि लोगों को अपनी समस्याओं के लिए राजधानी तक लंबी यात्रा न करनी पड़े।
उपायुक्त ने अधिकारियों को शिविर में मिले आवेदनों का सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ समयबद्ध निष्पादन करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि कोई भी पात्र दिव्यांग व्यक्ति सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित नहीं रहना चाहिए। उप विकास आयुक्त ने दिव्यांग बच्चों की शिक्षा पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता बताई। उन्होंने जानकारी दी कि सदर अस्पताल में प्रत्येक बुधवार मेडिकल बोर्ड के माध्यम से दिव्यांगता प्रमाणपत्र बनाया जाता है।
शिविर में बताया गया कि नए दिव्यांगता अधिनियम के तहत दिव्यांगता की श्रेणियां सात से बढ़ाकर 21 की गई हैं। 40 प्रतिशत दिव्यांगता होने पर प्रमाणपत्र जारी किया जाता है। यह प्रमाणपत्र शिक्षा और रोजगार में आरक्षण तथा परिवहन रियायत जैसी सुविधाओं का लाभ लेने में उपयोगी होता है।
जिला समाज कल्याण पदाधिकारी आरती कुमारी के अनुसार, गुमला जिले में 12,374 दिव्यांगजन चिह्नित हैं और इनमें 11,586 लाभुकों को प्रतिमाह एक हजार रुपये पेंशन दी जा रही है। उन्होंने बताया कि इंदिरा गांधी राष्ट्रीय दिव्यांग पेंशन योजना के 628 लाभुकों को जुलाई 2026 तक तथा स्वामी विवेकानंद निःशक्त स्वावलंबन प्रोत्साहन योजना के 10,958 लाभुकों को सितंबर 2026 तक भुगतान किया जा चुका है।