धनबाद के बारामुड़ी में करीब 200 परिवारों पर विस्थापन का संकट, सरकारी जमीन की नापी शुरू

बारामुड़ी खटाल में सरकारी जमीन की नापी और अतिक्रमण वाले हिस्सों को चिह्नित करने की प्रक्रिया शुरू होने से करीब 200 परिवार चिंतित हैं। प्रशासन नोटिस देकर उनका पक्ष सुनेगा।

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धनबाद के बारामुड़ी खटाल क्षेत्र में सरकारी जमीन की नापी से चिंतित स्थानीय परिवार

धनबाद शहर के बारामुड़ी खटाल में सरकारी जमीन की नापी शुरू होने के बाद वहां रह रहे करीब 200 परिवारों के सामने विस्थापन की आशंका खड़ी हो गई है। ये परिवार लंबे समय से इस क्षेत्र में पशुपालन और दूध के कारोबार से अपनी आजीविका चलाने का दावा कर रहे हैं। प्रशासन फिलहाल जमीन की सीमा और कथित अतिक्रमण वाले हिस्सों को चिह्नित कर रहा है।

स्थानीय लोगों के अनुसार, वर्ष 2005 में उन्हें बेकारबांध से हटाकर बारामुड़ी लाया गया था। उनका कहना है कि इसके बाद उन्होंने यहां घर बनाए और पशुओं को रखकर परिवार का भरण-पोषण शुरू किया। अब 21 वर्ष बाद संभावित कार्रवाई की सूचना से उन्हें आवास के साथ रोजगार प्रभावित होने की भी चिंता है।

परिवारों का कहना है कि बार-बार स्थान बदलने की स्थिति से उनके बच्चों और आजीविका पर असर पड़ेगा। कुछ लोग शांतिपूर्ण ढंग से प्रशासन के सामने अपनी मांग रखने और जरूरत पड़ने पर कानूनी रास्ता अपनाने की बात कह रहे हैं। कई परिवार वर्तमान स्थान पर ही रहने की अनुमति चाहते हैं।

धनबाद अंचल प्रशासन के मुताबिक, बारामुड़ी में करीब 200 घर सरकारी जमीन पर बने हैं और क्षेत्र में लगभग 20 एकड़ सरकारी भूमि है। अंचल अधिकारी रामप्रवेश कुमार ने बताया कि नापी के बाद चिह्नित लोगों को नोटिस जारी किया जाएगा और उन्हें अपना पक्ष रखने का अवसर मिलेगा। दस्तावेजों तथा जवाबों की जांच के बाद नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

अंचल अधिकारी के अनुसार, वर्ष 2005 में इन परिवारों को स्थायी रूप से बसाने का कोई आदेश उनके संज्ञान में नहीं है। प्रशासन का पक्ष है कि उस समय परिवारों को अस्थायी तौर पर स्थानांतरित किया गया था। इस तरह स्थायी पुनर्वास को लेकर निवासियों और प्रशासन के दावों में अंतर बना हुआ है।

प्रभावित परिवारों ने उपायुक्त से मिलकर अपनी समस्या रखने का निर्णय लिया है। उनकी मांग है कि यदि जमीन खाली कराई जाती है तो स्थायी पुनर्वास के साथ पशुओं को रखने और दूध का कारोबार जारी रखने की व्यवस्था भी की जाए। प्रशासन ने पंपू तालाब के आसपास के करीब 600 घरों तथा लोको तालाब और राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे सरकारी जमीन पर कथित अतिक्रमण चिह्नित करने की योजना भी बताई है।