धनबाद स्थित बीसीसीएल केंद्रीय अस्पताल में कैंसर और हृदय रोग के इलाज के लिए अलग-अलग यूनिट शुरू करने की तैयारी तेज हो गई है। योजना के अनुसार दोनों इकाइयों का संचालन पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल पर किया जाएगा। आवश्यक प्रक्रिया पूरी होने पर इन्हें अगले तीन से चार महीने में चालू करने का लक्ष्य रखा गया है।
इस परियोजना के लिए गठित कमेटी ने बीएम बिड़ला और टाटा कैंसर अस्पताल का निरीक्षण करने के बाद अपनी रिपोर्ट बीसीसीएल के उच्च प्रबंधन को सौंप दी है। रिपोर्ट के आधार पर प्रबंधन ने केंद्रीय अस्पताल में कैंसर और कार्डियोलॉजी सेवाएं विकसित करने की योजना को मंजूरी दे दी है। हालांकि, उपचार शुरू होने से पहले समझौते और दूसरी औपचारिकताएं पूरी की जानी हैं।
अगले चरण में कंसल्टेंट की सहायता से विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जाएगी और समझौता ज्ञापन को अंतिम रूप दिया जाएगा। इसमें बीसीसीएल की ओर से उपलब्ध कराए जाने वाले भवन, जमीन तथा अन्य संसाधनों का उल्लेख होगा। निजी भागीदार की भूमिका और जिम्मेदारियां भी इसी प्रक्रिया में निर्धारित की जाएंगी।
फिलहाल गंभीर बीमारियों से जूझ रहे कई बीसीसीएल कर्मचारियों को इलाज के लिए दूसरे शहरों के अस्पतालों में भेजना पड़ता है। प्रस्तावित इकाइयां शुरू होने पर कर्मचारियों और उनके परिजनों की बाहर के अस्पतालों पर निर्भरता कम होने की उम्मीद है। धनबाद तथा आसपास के क्षेत्रों के जरूरतमंद मरीजों को भी स्थानीय स्तर पर बेहतर चिकित्सा सुविधा मिल सकती है।
कंपनी प्रबंधन के मुताबिक बाहर इलाज कराने की मौजूदा व्यवस्था पर हर वर्ष लाखों रुपये खर्च होते हैं। केंद्रीय अस्पताल में संबंधित सेवाएं मिलने से मरीजों की यात्रा संबंधी परेशानी घटने के साथ कंपनी के चिकित्सा खर्च में भी कमी आने की संभावना जताई गई है। यह लाभ सुविधाओं के निर्धारित समय में शुरू होने और उनकी उपलब्धता पर निर्भर करेगा।
दोनों यूनिटों का वास्तविक उपयोग विशेषज्ञ चिकित्सकों, आधुनिक उपकरणों, जरूरी जांच और उपचार की पर्याप्त व्यवस्था होने के बाद ही संभव होगा। प्रबंधन ने तीन से चार महीने में जरूरी प्रक्रियाएं पूरी करने का लक्ष्य रखा है। परियोजना के लागू होने पर इलाज कितना सुलभ और किफायती रहेगा, यह पीपीपी समझौते और तैयार की जाने वाली विस्तृत व्यवस्था से स्पष्ट होगा।