धनबाद में त्योहारों के दौरान खाद्य पदार्थों की बढ़ती मांग के बीच खाद्य सुरक्षा विभाग ने मिलावट के खिलाफ जांच अभियान तेज कर दिया है। विभागीय जांच में बाजारों, होटलों और ढाबों में मिलने वाले पनीर के करीब आधे हिस्से को नकली या मिलावटी पाया गया है। मार्च से अक्टूबर तक की कार्रवाई में 5,000 किलोग्राम से अधिक ऐसा पनीर जब्त कर नष्ट किया गया।
पिछले आठ महीनों में विभाग ने अलग-अलग खाद्य पदार्थों के कुल 315 नमूनों की जांच की। निर्धारित नियमों का पालन नहीं करने वाले लगभग 150 छोटे दुकानदारों को चेतावनी जारी की गई। गंभीर रूप से खराब मिले 30 नमूनों से संबंधित विक्रेताओं पर जुर्माना लगाए जाने की जानकारी भी दी गई है।
दुर्गा पूजा के दौरान चलंत प्रयोगशाला की मदद से ठेला, पानीपुरी और मोमोज की 200 से अधिक दुकानों की मौके पर जांच की गई थी। विभाग ने अब दीपावली को देखते हुए निगरानी और कार्रवाई बढ़ाई है, ताकि अधिक मांग वाले खाद्य उत्पादों में होने वाली मिलावट पर रोक लगाई जा सके।
जांच अभियान में मिठाई, मोमोज, मंचूरियन और चाट में प्रतिबंधित रंग के इस्तेमाल को लेकर भी दुकानदारों और ग्राहकों को सचेत किया गया है। विभाग के अनुसार, चमड़ा रंगने में प्रयुक्त रंग का खाद्य सामग्री में इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। अधिकारियों ने कारोबारियों को खाद्य सुरक्षा नियमों का पालन करने की हिदायत दी है।
खाद्य सुरक्षा अधिकारी राजा कुमार ने पनीर की घरेलू स्तर पर प्रारंभिक जांच का तरीका भी बताया। उनके अनुसार, पनीर के टुकड़े को पानी में उबालकर ठंडा करने के बाद उस पर आयोडीन टिंचर की दो से तीन बूंदें डालने पर उसका रंग नीला, काला या गहरा बैंगनी हो जाए तो उसमें मिलावट की आशंका हो सकती है।
सदर अस्पताल के चिकित्सक डॉ. राजीव कुमार सिंह के मुताबिक, नकली पनीर में इस्तेमाल होने वाले यूरिया, डिटर्जेंट, खराब पाम ऑयल और ट्रांस फैट स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकते हैं। उन्होंने ऐसे उत्पादों से फूड पॉइजनिंग, पाचन संबंधी समस्या तथा किडनी, लिवर और हृदय पर प्रतिकूल प्रभाव का खतरा बताया है। विभाग की कार्रवाई के साथ उपभोक्ताओं से भी खाद्य पदार्थ खरीदते समय सावधानी बरतने की अपेक्षा की गई है।