धनबाद में अधिवक्ता की हत्या की कथित साजिश नाकाम, हथियार के साथ एक आरोपी गिरफ्तार

धनबाद पुलिस ने भूली क्षेत्र में छापेमारी कर एक युवक को देसी पिस्तौल और कारतूस के साथ गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार, अधिवक्ता मोहम्मद जावेद को निशाना बनाने की योजना थी और तीन अन्य संदिग्ध फरार हैं।

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धनबाद में अधिवक्ता की हत्या की कथित साजिश पर कार्रवाई करती पुलिस

धनबाद पुलिस ने एक अधिवक्ता की हत्या की कथित योजना को वारदात से पहले विफल करने का दावा किया है। पुलिस के अनुसार, भूली के सी-ब्लॉक स्थित छठ घाट के पास की गई छापेमारी में एक युवक को पकड़ा गया। उसके पास से एक देसी पिस्तौल और एक जिंदा कारतूस बरामद हुआ है। मौके से तीन अन्य संदिग्ध अंधेरे का लाभ उठाकर भाग निकले।

डीएसपी (लॉ एंड ऑर्डर) प्रकाश सोय ने प्रेस वार्ता में बताया कि पुलिस को हथियारों के साथ कुछ लोगों के सुनसान स्थान पर जुटने की गुप्त सूचना मिली थी। इसके बाद वरीय पुलिस अधीक्षक प्रभात कुमार के निर्देश पर छापेमारी दल बनाया गया। पुलिस ने स्थान की घेराबंदी की तो वहां मौजूद बाइक सवार युवक भागने लगे। इसी दौरान गिर पड़े एक युवक को टीम ने पकड़ लिया।

पुलिस ने गिरफ्तार युवक की पहचान 23 वर्षीय आसिफ आलम के रूप में बताई है। वह धनबाद के ईस्ट बसुरिया ओपी क्षेत्र स्थित निचितपुर टाउनशिप का निवासी बताया गया है। तलाशी के दौरान उसकी कमर से पिस्तौल और जेब से कारतूस मिलने की बात कही गई है। बरामद कारतूस के पेंदे पर “8 MM KF” अंकित था।

प्रारंभिक पूछताछ के आधार पर पुलिस का दावा है कि आरोपी अपने साथियों के साथ झरिया निवासी अधिवक्ता मोहम्मद जावेद की हत्या की योजना बना रहा था। जांच में यह भी सामने आने की बात कही गई है कि आरोपी दो दिनों से अधिवक्ता की आवाजाही और दिनचर्या की रेकी कर रहे थे। कथित तौर पर शनिवार को योजना को अंजाम दिया जाना था।

पुलिस के मुताबिक, इस योजना के तार रामगढ़ जेल में बंद एक अपराधी से जुड़े होने का संदेह है। आरोप है कि जेल में बंद व्यक्ति की कानूनी पैरवी के लिए अधिवक्ता पर दबाव बनाया जा रहा था। इन दावों की जांच अभी जारी है और पुलिस जेल में बंद कथित साजिशकर्ता की पहचान के साथ हथियार के स्रोत का भी पता लगा रही है।

भूली ओपी में इस मामले को लेकर कांड संख्या 164/26 दर्ज किया गया है। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता और शस्त्र अधिनियम की संबंधित धाराओं में कार्रवाई शुरू की है। फरार तीन संदिग्धों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की जा रही है। पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही कथित साजिश में सभी आरोपियों की भूमिका स्पष्ट हो सकेगी।