धनबाद में गोल्फ ग्राउंड को खेलों के लिए सुरक्षित रखने की मांग, बच्चों और युवाओं ने निकाला पैदल मार्च

रणधीर वर्मा स्टेडियम में लंबे समय तक मेला लगाने के विरोध में बच्चों और युवाओं ने प्रदर्शन किया। उन्होंने मैदान को खेल गतिविधियों के लिए सुरक्षित रखने की मांग उठाई।

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धनबाद में गोल्फ ग्राउंड को खेलों के लिए सुरक्षित रखने की मांग करते बच्चे और युवा

धनबाद के रणधीर वर्मा स्टेडियम, जिसे गोल्फ ग्राउंड के नाम से भी जाना जाता है, को खेल गतिविधियों के लिए सुरक्षित रखने की मांग को लेकर मंगलवार को बड़ी संख्या में बच्चे और युवा सड़कों पर उतरे। प्रदर्शन में शामिल लोगों ने मैदान से रणधीर वर्मा चौक तक पैदल मार्च निकाला और प्रशासन से प्रस्तावित मेला आयोजन पर पुनर्विचार करने की मांग की।

मार्च के दौरान बच्चों और युवाओं ने हाथों में पोस्टर तथा तख्तियां ले रखी थीं। इनके माध्यम से गोल्फ ग्राउंड को मेला मुक्त रखने का संदेश दिया गया। प्रदर्शनकारियों के अनुसार, यह धनबाद का प्रमुख खेल मैदान है, जहां रोजाना बड़ी संख्या में खिलाड़ी क्रिकेट, फुटबॉल और अन्य खेलों का अभ्यास करते हैं।

खेल प्रेमियों का कहना है कि मैदान में लंबे समय तक मेला लगने से करीब दो महीने तक अभ्यास प्रभावित होता है। उनका तर्क है कि आयोजन समाप्त होने के बाद भी मैदान को दोबारा खेल योग्य बनाने में समय लगता है। उन्होंने मेला लगाने के लिए शहर में किसी वैकल्पिक स्थान का चयन करने का सुझाव दिया।

प्रदर्शन में शामिल लोगों के मुताबिक, वे इस विषय में जिला प्रशासन, नगर निगम और जनप्रतिनिधियों को पहले भी लिखित आवेदन दे चुके हैं। दुर्गापूजा के अवसर पर मैदान में डिजनीलैंड मेला लगाने की प्रक्रिया आगे बढ़ने की सूचना के बाद खिलाड़ियों और युवाओं का विरोध तेज हुआ है। मीडिया रिपोर्ट में मेला लगाने के लिए आवेदन करने वालों में से दो आवेदकों को मंजूरी मिलने की बात कही गई है।

गोल्फ ग्राउंड में मेला लगाने का मुद्दा इससे पहले भी उठ चुका है। उपलब्ध विवरण के अनुसार, धनबाद विधायक राज सिन्हा, डुमरी विधायक जयराम महतो, जिला परिषद अध्यक्ष शारदा सिंह और पूर्व महापौर चंद्रशेखर अग्रवाल सहित कई जनप्रतिनिधि मैदान में मेला आयोजित करने का विरोध कर चुके हैं।

पैदल मार्च में शामिल बच्चों ने जिला प्रशासन और नगर निगम से मैदान को नियमित खेल अभ्यास के लिए संरक्षित रखने की अपील की। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि मांग पूरी नहीं होने पर वे शांतिपूर्ण तरीके से अपना आंदोलन आगे भी जारी रखेंगे।