धनबाद में होर्डिंग और पोस्टर के माध्यम से अपना प्रचार करने वाले अस्पतालों, चिकित्सीय संस्थानों और डॉक्टरों पर निगरानी बढ़ाई जाएगी। झारखंड राज्य चिकित्सा परिषद ने इस तरह के व्यावसायिक प्रचार को चिकित्सकीय नैतिकता के विरुद्ध बताते हुए राज्य के सिविल सर्जनों से संबंधित संस्थानों और चिकित्सकों की जानकारी मांगी है।
परिषद के निर्देश के अनुसार, सिविल सर्जनों को विज्ञापन देने वाले अस्पतालों और डॉक्टरों को चिह्नित करना होगा। रिपोर्ट में संबंधित संस्थान या चिकित्सक का नाम और पता दर्ज करने के साथ लगाए गए होर्डिंग या पोस्टर की तस्वीरें भी भेजनी होंगी। इन्हीं साक्ष्यों के आधार पर आगे की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
रिपोर्ट में नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होने पर पहले संबंधित अस्पताल, चिकित्सीय संस्थान या डॉक्टर को चेतावनी पत्र जारी किया जाएगा। चेतावनी के बाद भी प्रचार जारी रखने की स्थिति में नियमानुसार अर्थदंड लगाया जा सकता है। पंजीकरण निलंबित करने तक की कार्रवाई का प्रावधान भी बताया गया है।
चिकित्सा परिषद ने अपने निर्देश में नेशनल मेडिकल कमीशन की नैतिक विज्ञापन और सार्वजनिक संचार संबंधी गाइडलाइन का उल्लेख किया है। परिषद के मुताबिक, होर्डिंग और विज्ञापनों के जरिए किया जाने वाला व्यावसायिक प्रचार चिकित्सकीय पेशे की गरिमा तथा निर्धारित आचार संहिता के अनुरूप नहीं है।
इस पहल का उद्देश्य अस्पतालों और चिकित्सकों के सार्वजनिक प्रचार पर साक्ष्य आधारित निगरानी रखना तथा पेशे में तय नैतिक मानकों का पालन सुनिश्चित करना है। धनबाद में अब स्थानीय स्तर पर ऐसे विज्ञापनों की पहचान और दस्तावेजीकरण के बाद परिषद को रिपोर्ट भेजे जाने की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। किसी भी दंडात्मक कार्रवाई से पहले चेतावनी देने की व्यवस्था रखी गई है।