धनबाद जिला प्रशासन ने दुर्गा पूजा को शांतिपूर्ण और सुरक्षित ढंग से संपन्न कराने के लिए पूजा समितियों तथा संबंधित विभागों को विस्तृत दिशा-निर्देश दिए हैं। समाहरणालय सभागार में उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी आदित्य रंजन और वरीय पुलिस अधीक्षक प्रभात कुमार की संयुक्त अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में सुरक्षा, यातायात, बिजली, स्वास्थ्य सेवाओं और विसर्जन की तैयारियों पर चर्चा की गई।
प्रशासन के अनुसार, प्रत्येक पूजा समिति को सुरक्षा नियमों के पालन का लिखित आश्वासन देना होगा। पंडालों के लिए अग्निशमन विभाग, भवन प्रमंडल और विद्युत विभाग से अनापत्ति प्रमाणपत्र लेना अनिवार्य रहेगा। निर्माण में नायलॉन, सिंथेटिक या दूसरी ज्वलनशील सामग्री का उपयोग नहीं किया जा सकेगा। पंडाल परिसर में अग्निशामक यंत्र, बालू की बाल्टियां, प्राथमिक उपचार और बिजली जाने पर वैकल्पिक व्यवस्था रखनी होगी।
भीड़ प्रबंधन के लिए महिला और पुरुष श्रद्धालुओं की अलग कतारों के साथ पृथक प्रवेश और निकास मार्ग बनाने को कहा गया है। समितियों को बैरिकेडिंग, पर्याप्त वेंटिलेशन और खोया-पाया केंद्र की व्यवस्था करनी होगी। पहचानपत्र वाले स्वयंसेवक तैनात किए जाएंगे और उनके नाम तथा मोबाइल नंबर संबंधित थाने को उपलब्ध कराने होंगे। प्रमुख पंडालों में इंटरनेट से जुड़े सीसीटीवी कैमरे लगाने का भी निर्देश है।
पूजा पंडालों और विसर्जन जुलूसों में डीजे के इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक रहेगी। लाउडस्पीकर केवल निर्धारित समय और तय ध्वनि सीमा के भीतर चलाए जा सकेंगे। प्रशासन ने अफवाहों तथा आपत्तिजनक सामग्री पर नजर रखने के लिए साइबर मॉनिटरिंग सेल को सक्रिय किया है। भ्रामक या विवादित सोशल मीडिया पोस्ट करने वालों के विरुद्ध कार्रवाई की बात भी कही गई है।
विसर्जन स्थलों पर दंडाधिकारी और पुलिस बल तैनात किए जाएंगे। प्रमुख जलाशयों के पास बैरिकेडिंग, नाव, प्रशिक्षित गोताखोर, वॉच टावर और सार्वजनिक उद्घोषणा प्रणाली की व्यवस्था होगी। जुलूस में शामिल वाहन चालकों के पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस होना जरूरी होगा, जबकि रास्ते में वाहन खराब होने की स्थिति के लिए क्रेन उपलब्ध रखी जाएगी। छोटे बच्चों को विसर्जन जुलूस में नहीं ले जाने की सलाह दी गई है।
उपायुक्त ने संबंधित विभागों और नगर निकायों को पंडालों तक जाने वाली सड़कों की मरम्मत तथा प्रमुख चौक-चौराहों से अतिक्रमण हटाने का निर्देश दिया है। विद्युत विभाग को जर्जर या लटकते तार और खराब खंभे ठीक करने को कहा गया है। सुरक्षा, स्वच्छता और प्रशासनिक निर्देशों का बेहतर पालन करने वाली पूजा समितियों के लिए 51 हजार रुपये तक के नकद पुरस्कार भी निर्धारित किए गए हैं।