धनबाद रिंग रोड मुआवजा मामले में 85 वर्षीय आरोपी गिरफ्तार, अब तक 18 पर कार्रवाई

धनबाद रिंग रोड भूमि अधिग्रहण से जुड़े कथित मुआवजा फर्जीवाड़े में एसीबी ने 85 वर्षीय नरसिंह दास को गिरफ्तार किया है। उन पर जाली दस्तावेज के आधार पर 6.32 करोड़ रुपये से अधिक लेने का आरोप है।

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धनबाद रिंग रोड भूमि अधिग्रहण मुआवजा मामले में एसीबी की कार्रवाई

धनबाद रिंग रोड के लिए हुए भूमि अधिग्रहण से जुड़े कथित मुआवजा फर्जीवाड़े में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने एक और आरोपी को गिरफ्तार किया है। एसीबी के अनुसार, गिरफ्तार व्यक्ति की पहचान 85 वर्षीय नरसिंह दास के रूप में हुई है। वह बिहार के अरवल जिले के परशुरामपुर गांव का निवासी है। इस गिरफ्तारी के बाद मामले में पकड़े गए आरोपियों की संख्या 18 हो गई है।

नरसिंह दास को पांच नवंबर को निगरानी थाना कांड संख्या 32/16 के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया। एसीबी का आरोप है कि धनबाद मौजा संख्या 51 के खाता संख्या 121 और प्लॉट संख्या 1630 से संबंधित जाली दस्तावेज के आधार पर सरकारी मुआवजा प्राप्त किया गया। कथित रूप से ली गई राशि 6 करोड़ 32 लाख 13 हजार 585 रुपये 99 पैसे बताई गई है।

एसीबी की प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, संबंधित जमीन की 21 अक्टूबर 1970 की रजिस्ट्री के दस्तावेज में कूटरचना करने का आरोप है। जिला अवर निबंधक कार्यालय से मिले अभिलेखों में मूल रजिस्ट्री हराधन महतो एवं अन्य के नाम पर बांग्ला लिपि में दर्ज थी। जांच एजेंसी का दावा है कि अंग्रेजी में तैयार कथित कूटरचित दस्तावेज का इस्तेमाल मुआवजा हासिल करने के लिए किया गया।

इस मामले में जनवरी 2026 के दौरान एसीबी ने 17 आरोपियों को गिरफ्तार किया था। उनमें तत्कालीन जिला भू-अर्जन पदाधिकारी उदयकांत पाठक, तत्कालीन अंचल अधिकारी विशाल कुमार और कानूनगो मिथिलेश कुमार भी शामिल थे। इसके अलावा भू-अर्जन कार्यालय के कर्मचारियों, अमीन और कथित बिचौलियों पर भी कार्रवाई हुई थी।

मामला रिंग रोड निर्माण के लिए जमीन अधिग्रहण के दौरान सरकारी मुआवजे के भुगतान से जुड़ा है। जांच एजेंसी के अनुसार, जाली अभिलेखों के सहारे सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाने और करोड़ों रुपये प्राप्त करने के आरोपों की पड़ताल की जा रही है। ताजा गिरफ्तारी भी उसी प्रकरण में हुई है जिसमें जनवरी में सामूहिक कार्रवाई की गई थी।

एसीबी अब गिरफ्तार आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेजने की प्रक्रिया पूरी कर रही है। जांच एजेंसी की कार्रवाई से मामले का दायरा आगे बढ़ा है। हालांकि, दस्तावेजों में कूटरचना और अवैध मुआवजा लेने संबंधी दावे अभी आरोप हैं; इन पर अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।