धनबाद जिले के निरसा थाना क्षेत्र के हाथबाड़ी में बुधवार को हुई मुठभेड़ के बाद वैज्ञानिक जांच शुरू कर दी गई है। गुरुवार को रांची से पहुंची स्टेट फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी की टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और वहां उपलब्ध भौतिक, डिजिटल तथा अन्य संभावित साक्ष्यों को सुरक्षित किया। यह मुठभेड़ पुलिस और शिबू उर्फ सागर उर्फ विजय सिंह के बीच हुई थी।
पुलिस के अनुसार, हाथबाड़ी स्थित एक घर में छापेमारी के दौरान दोनों ओर से कई राउंड गोलियां चली थीं। इस दौरान शिबू के पैर में गोली लगी। इसके बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर इलाज के लिए अस्पताल भेज दिया। पुलिस ने उसके पास से हथियार और कारतूस मिलने का दावा किया है। वैज्ञानिक जांच के लिए घटनास्थल को सुरक्षित रखा गया था।
एसएफएसएल टीम ने मौके से मिली नौ एमएम पिस्टल, कारतूस, खोखे और दूसरी सामग्रियों की तकनीकी जांच की। परिसर से जब्त सीसीटीवी प्रणाली के डीवीआर और अन्य डिजिटल साक्ष्यों को भी जांच में शामिल किया गया। विशेषज्ञों ने वस्तुओं की स्थिति और उनके संभावित आपसी संबंध दर्ज किए।
जांच के दौरान घटनास्थल की फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी कराई गई। टीम ने गोलीबारी से जुड़े संभावित स्थानों और मौके की संरचना का दस्तावेजीकरण किया। फिंगरप्रिंट के साथ रक्त या अन्य संभावित जैविक नमूनों की उपलब्धता भी परखी गई। मोबाइल फोन, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और सीसीटीवी फुटेज की फोरेंसिक जांच भी प्रस्तावित है।
इस कार्रवाई के दौरान निरसा थाना प्रभारी अजीत कुमार भारती, चिरकुंडा थाना प्रभारी आशुतोष कुमार, टेक्निकल सेल के अधिकारी और अन्य पुलिसकर्मी मौजूद रहे। स्थानीय पुलिस ने घटनास्थल को सुरक्षित रखते हुए फोरेंसिक विशेषज्ञों को जांच में सहयोग दिया।
पुलिस का कहना है कि शिबू का नाम वर्ष 2017 में धनबाद के पूर्व डिप्टी मेयर नीरज सिंह और तीन अन्य लोगों की हत्या के मामले में सामने आया था। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, हाल के एक अन्य आपराधिक मामले की जांच में भी उसका नाम आया है। हालांकि इन मामलों पर अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है। एसएफएसएल की रिपोर्ट मिलने के बाद मुठभेड़ से जुड़ी परिस्थितियों को अधिक स्पष्ट करने में मदद मिलने की उम्मीद है।