नेतरहाट मार्ग के चटकपुर चौक पर वेसाइड सुविधा की योजना, जमीन चिह्नित

गुमला जिला प्रशासन ने चटकपुर चौक के पास पर्यटकों के लिए विश्राम, खानपान, शौचालय और पार्किंग की सुविधा विकसित करने हेतु सरकारी जमीन चिह्नित कर पर्यटन विभाग को प्रतिवेदन भेजा है।

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नेतरहाट मार्ग के चटकपुर चौक पर प्रस्तावित पर्यटक सुविधा का सांकेतिक दृश्य

गुमला जिले से नेतरहाट जाने वाले पर्यटकों की सुविधा के लिए चटकपुर चौक के पास वेसाइड एमेनिटी विकसित करने की योजना आगे बढ़ी है। जिला प्रशासन ने प्रस्तावित केंद्र के लिए सरकारी जमीन चिह्नित कर पर्यटन विभाग को प्रतिवेदन भेज दिया है। यहां यात्रियों के विश्राम, खानपान और स्वच्छता से जुड़ी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रस्ताव है।

प्रस्तावित स्थल नेतरहाट से करीब 23 किलोमीटर पहले राजकीय राजमार्ग के किनारे है। उपलब्ध विवरण के अनुसार, चटकपुर चौक के समीप लगभग 70 से 80 डिसमिल सरकारी भूमि चिह्नित की गई है। यह कार्रवाई उपायुक्त दिलेश्वर महतो के निर्देश पर की गई और अपर समाहर्ता की ओर से संबंधित प्रतिवेदन पर्यटन विभाग को उपलब्ध कराया गया है।

योजना में रेस्टोरेंट या ढाबा, रेस्ट हाउस, चाय-नाश्ते के स्टॉल, शौचालय और पार्किंग जैसी सुविधाएं विकसित करने की बात है। रांची समेत दूसरे शहरों और राज्यों से घाघरा-बिशुनपुर के रास्ते नेतरहाट जाने वाले पर्यटकों को इस मार्ग पर लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। ऐसे में प्रस्तावित केंद्र यात्रा के बीच ठहरने का व्यवस्थित स्थान बन सकता है।

इस मार्ग पर पांच पांडव पहाड़ और कोयल नदी जैसे प्राकृतिक स्थल यात्रियों को आकर्षित करते हैं। हालांकि रास्ते में व्यवस्थित विश्राम गृह, भोजन और शौचालय की कमी महसूस की जाती है। विशेष रूप से परिवार और बच्चों के साथ यात्रा करने वालों के लिए प्रस्तावित सुविधा उपयोगी हो सकती है। पर्यटन सीजन और विशेष अवसरों पर यात्रियों की संख्या बढ़ने से इसकी जरूरत और बढ़ जाती है।

वेसाइड केंद्र बनने पर आसपास आर्थिक गतिविधियां बढ़ने की भी संभावना जताई गई है। स्थानीय लोगों को खानपान, दुकान और दूसरी सेवाओं के संचालन से रोजगार के अवसर मिल सकते हैं। इसके साथ चटकपुर चौक को नेतरहाट पर्यटन मार्ग के एक पड़ाव के रूप में नई पहचान मिलने की उम्मीद है।

फिलहाल योजना निर्माण के चरण में नहीं पहुंची है। जिला प्रशासन ने भूमि चिह्नित करने और प्रतिवेदन भेजने की प्रक्रिया पूरी की है। अब पर्यटन विभाग की स्वीकृति तथा आगे की विभागीय प्रक्रिया के बाद ही योजना के क्रियान्वयन और निर्माण की स्थिति स्पष्ट होगी।