नोवामुंडी के कादाजामदा में हाथियों ने करीब चार एकड़ धान की फसल रौंदी

कादाजामदा पंचायत में 16 से 17 जंगली हाथियों का झुंड खेतों में घुस गया। ग्रामीणों ने वन विभाग से हाथियों को जंगल की ओर भेजने और प्रभावित किसानों को मुआवजा देने की मांग की है।

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पश्चिमी सिंहभूम जिले के नोवामुंडी प्रखंड की कादाजामदा पंचायत में जंगली हाथियों के झुंड ने करीब चार एकड़ में लगी धान की फसल रौंद दी। रिपोर्ट के मुताबिक, क्षतिग्रस्त फसल पंचायत के मुखिया हिरामन पुरती की थी। घटना के बाद जंगल से सटे इलाके के किसानों में चिंता बढ़ गई है।

ग्रामीणों के अनुसार, बुधवार और गुरुवार की दरमियानी रात करीब 16 से 17 हाथी जंगल से निकलकर खेतों में पहुंच गए। लोगों ने ढोल-नगाड़े बजाकर और आग जलाकर झुंड को हटाने की कोशिश की, लेकिन इस दौरान धान की खड़ी फसल को नुकसान पहुंचा।

इलाके के लोगों का कहना है कि हाथियों का यह झुंड पिछले लगभग एक सप्ताह से आसपास घूम रहा है। धान की फसल पकने के करीब होने के कारण किसान रात में जागकर अपने खेतों की निगरानी कर रहे हैं। इसके बावजूद हाथियों के खेत में प्रवेश को नहीं रोका जा सका।

हिरामन पुरती ने बताया कि खेती उनके परिवार की आजीविका का प्रमुख साधन है। उनका कहना है कि इस वर्ष अच्छी बारिश के कारण फसल बेहतर हुई थी, लेकिन हाथियों के आने से मेहनत और उपज दोनों प्रभावित हुए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि क्षेत्र में पहले अन्य किसानों की फसलों को भी हाथियों से नुकसान पहुंच चुका है।

घटना की सूचना वन विभाग को दिए जाने की बात कही गई है। ग्रामीणों ने विभाग से मांग की है कि हाथियों को आबादी और खेतों से दूर जंगल की ओर ले जाने के लिए टीम तैनात की जाए। इसके साथ ही उन्होंने फसल क्षति का आकलन कर प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा देने की मांग रखी है।

कादाजामदा और नोवामुंडी का इलाका सारंडा जंगल से सटा हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, कादाजामदा के अलावा बड़ाजामदा, कांतोड़ेया, परम बालजोड़ी, बड़ा बालजोड़ी, सिंदरी गौरी, दिरीबुरु और दुधबिला जैसे आसपास के क्षेत्रों में भी धान कटनी के समय हाथियों की गतिविधियां बढ़ने की शिकायत सामने आती रही है।