मांडू कृषि विज्ञान केंद्र में बंद मशीन और उपेक्षित तालाब पर आईसीएआर निदेशक ने जताई नाराजगी

आईसीएआर निदेशक डॉ. एमएल जाट ने मांडू कृषि विज्ञान केंद्र का निरीक्षण कर उपलब्ध संसाधनों को किसानों के हित में उपयोग करने का निर्देश दिया।

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रामगढ़ जिले के मांडू कृषि विज्ञान केंद्र में शुक्रवार को आयोजित कृषि वैज्ञानिक-किसान जनसंवाद के दौरान केंद्र के संसाधनों के उपयोग का मुद्दा प्रमुखता से उठा। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली के निदेशक डॉ. एमएल जाट ने केंद्र का निरीक्षण किया और किसानों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने तथा उनकी कृषि संबंधी समस्याओं के समाधान पर जोर दिया।

निरीक्षण के दौरान केंद्र की एक अत्याधुनिक मशीन करीब दो वर्षों से बंद मिली। केंद्र प्रभारी से इसकी जानकारी लेने के बाद निदेशक ने नाराजगी जताई। उन्होंने संबंधित पदाधिकारियों को मशीन का उपयोग सुनिश्चित करने का निर्देश दिया, ताकि केंद्र में उपलब्ध तकनीकी सुविधा का लाभ किसानों तक पहुंच सके।

कार्यक्रम में शामिल किसानों ने केंद्र परिसर के तालाब की स्थिति भी निदेशक के सामने रखी। किसानों के अनुसार यह तालाब पिछले तीन से चार वर्षों से उपेक्षित है। यहां पहले मछली पालन किया जाता था, लेकिन अब यह गतिविधि बंद हो चुकी है। किसानों ने उपलब्ध संसाधन निष्क्रिय रहने पर सवाल उठाया।

जनसंवाद में किसानों को अपनी समस्याएं और सुझाव सीधे रखने का अवसर मिला। चर्चा का केंद्र यह रहा कि कृषि विज्ञान केंद्र के संसाधनों और तकनीकी व्यवस्थाओं को नियमित रूप से इस्तेमाल में लाया जाए। कार्यक्रम में सामने आए विषय मशीन के संचालन तक सीमित नहीं रहे, बल्कि कृषि आधारित गतिविधियों को फिर से सक्रिय करने की आवश्यकता भी रेखांकित हुई।

केंद्र पहुंचने पर कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय की छात्राओं ने नृत्य प्रस्तुत कर अतिथि का स्वागत किया। इसके बाद डॉ. जाट ने पौधरोपण किया और परिसर का जायजा लिया। निरीक्षण तथा जनसंवाद में दिए गए निर्देशों का मुख्य उद्देश्य केंद्र की सुविधाओं को किसानों के लिए उपयोगी बनाना और स्थानीय कृषि गतिविधियों से उनका जुड़ाव बढ़ाना रहा।