पश्चिमी सिंहभूम के नोवामुंडी वन क्षेत्र में जंगली हाथियों के अलग-अलग झुंडों की गतिविधियों ने ग्रामीणों और किसानों की चिंता बढ़ा दी है। दिन के समय जंगलों में रहने वाले हाथी रात होते ही खेतों की ओर निकल रहे हैं। खेतों में पहुंचकर वे खड़ी धान की फसल को रौंद रहे हैं, जिससे फसल तैयार होने के समय किसानों को नुकसान उठाना पड़ रहा है।
हाथियों की मौजूदगी गीतकेंदू, डूमरजुवा, रैबिट लोवा, सर्विल, बालजोड़ी, परम बालजोड़ी, नोवामुंडी बस्ती और दिरीबुरु क्षेत्र में बताई गई है। कई स्थानों पर इनके अलग-अलग समूह सक्रिय हैं। इसके कारण ग्रामीणों के लिए यह अनुमान लगाना कठिन हो रहा है कि कोई झुंड किस दिशा से खेतों या आबादी के आसपास पहुंच सकता है।
स्थानीय ग्रामीणों से मिली जानकारी के अनुसार, गीतकेंदू क्षेत्र में करीब 15 हाथियों का एक झुंड घूम रहा है। इसमें हाथियों के बच्चे भी शामिल हैं। परम बालजोड़ी में सात से आठ, नोवामुंडी बस्ती में छह से सात और सर्विल क्षेत्र में भी छह से सात हाथियों की गतिविधि बताई गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि हाथी मुख्य झुंड से अलग होकर छोटे समूहों में विचरण कर रहे हैं। अंधेरा होने के बाद उनकी आवाजाही बढ़ने से खेतों और आसपास के इलाकों में विशेष सतर्कता रखनी पड़ रही है। किसानों के लिए चिंता की बड़ी वजह यह है कि धान की फसल अभी खेतों में खड़ी है और हाथियों के लगातार पहुंचने से नुकसान बढ़ सकता है।
प्रभावित क्षेत्रों के ग्रामीणों ने वन विभाग से हाथियों की गतिविधियों पर नजर रखने की मांग की है। उन्होंने हाथियों को खेतों और आबादी वाले इलाकों से दूर रखने के लिए आवश्यक कदम उठाने का आग्रह किया है। किसानों का कहना है कि समय रहते स्थिति नियंत्रित नहीं हुई तो तैयार धान की फसल को बड़े स्तर पर क्षति पहुंच सकती है।