साहिबगंज जिले के नारायणपुर गांव से करीब नौ साल पहले लापता हुए यासीन शेख का पता इंस्टाग्राम पर प्रसारित 10 सेकंड की एक रील से चला। वीडियो में दिखाई दे रहे युवक की मुस्कान देखकर परिवार के एक सदस्य को उसके यासीन होने का संदेह हुआ। इसके बाद परिवार ने केरल के उस देखभाल केंद्र से संपर्क किया, जहां वह कई वर्षों से रह रहा था।
उपलब्ध विवरण के अनुसार, यासीन वर्ष 2017 में दोस्तों के साथ खेलने के लिए घर से निकला था और फिर नहीं लौटा। उस समय उसकी उम्र करीब 26 वर्ष थी। परिजनों ने उसकी तलाश की और गुमशुदगी की शिकायत भी दर्ज कराई, लेकिन लंबे समय तक उसके ठिकाने की जानकारी नहीं मिल सकी।
उसी वर्ष केरल के कोझिकोड जिले के चेरुवाडी गांव में लोगों ने एक ऐसे युवक को भटकते देखा, जो अपना नाम और पता स्पष्ट रूप से नहीं बता पा रहा था। सूचना मिलने पर पुलिस उसे जिला बाल कल्याण समिति के पास ले गई। बाद में उसे एक देखभाल केंद्र में रखा गया, लेकिन संवाद करने में कठिनाई के कारण उसकी पहचान स्थापित नहीं हो सकी।
वर्ष 2023 में यासीन को कोझिकोड के कट्टीपारा स्थित विशेष जरूरतों वाले लोगों के लिए काम करने वाले करुण्यतीरम केंद्र भेज दिया गया। वहां उसे ‘रशीद’ नाम मिला। केंद्र में रहते हुए वह कार्यक्रमों में हिस्सा लेता था और कैमरे के सामने आना पसंद करता था। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, वह अपनी मां और गांव का उल्लेख करते हुए घर लौटने की इच्छा भी जताता था।
स्वतंत्रता दिवस पर सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर पेवुंडारा यासिर ने केंद्र में एक छोटा वीडियो बनाया था। इसमें यासीन हाथ में तिरंगा लेकर मुस्कुराता दिखाई दिया। रील वायरल होने के बाद उसे दस लाख से अधिक बार देखा गया। इसी वीडियो पर परिवार के एक रिश्तेदार की नजर पड़ी और पहचान की प्रक्रिया आगे बढ़ी।
परिवार ने आधार कार्ड समेत अन्य दस्तावेज केंद्र को उपलब्ध कराए। केरल और झारखंड के अधिकारियों ने दस्तावेजों तथा दूसरी जानकारियों का मिलान किया, जिसके बाद रशीद के रूप में रह रहे युवक की पहचान यासीन शेख के तौर पर हुई। उसने वीडियो कॉल पर पिता सोहराब शेख और भाई-बहनों से बात की। उसे लेने छोटा भाई अजुल शेख केरल पहुंचा। घर वापसी की खुशी के बीच परिवार को यह दुख भी है कि यासीन की मां का वर्ष 2023 में निधन हो चुका है।