पतरातू में झारखंड बंद समर्थकों ने सड़क जाम कर अधिकार और पुनर्वास की मांग उठाई

रामगढ़ के पतरातू में बंद समर्थकों ने सड़क जाम कर आंदोलनकारियों के सम्मान, विस्थापितों के पुनर्वास, किसानों की सहायता और स्थानीय रोजगार समेत कई मांगें रखीं।

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पतरातू न्यू मार्केट में सड़क जाम कर प्रदर्शन करते झारखंड बंद समर्थक

रामगढ़ जिले के पतरातू थाना क्षेत्र स्थित न्यू मार्केट में बुधवार को झारखंड बंद का असर दिखा। आंदोलनकारियों, विस्थापितों, किसानों, मजदूरों और झारखंड के लोगों के अधिकार तथा सम्मान से जुड़ी मांगों को लेकर बंद समर्थक सड़क पर उतरे। उन्होंने दुकानदारों से प्रतिष्ठान बंद रखने की अपील की और बाद में सड़क जाम कर नारेबाजी की।

प्रदर्शन का नेतृत्व ऑल इंडिया किसान सभा और विस्थापित प्रभावित युवा संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष मनोज महतो ने किया। बंद समर्थकों ने कहा कि अलग राज्य के लिए आंदोलन करने वाले लोगों को राजकीय सम्मान, अलग पहचान और सम्मानजनक पेंशन मिलनी चाहिए। उन्होंने आंदोलनकारियों के आश्रितों को रोजगार देने और छूटे हुए मूल आंदोलनकारियों की पहचान के लिए आयोग के पुनर्गठन अथवा कल्याण बोर्ड बनाने की मांग भी रखी।

विस्थापन और भूमि से जुड़े मुद्दे भी प्रदर्शन के केंद्र में रहे। आंदोलनकारियों ने लैंड बैंक रद्द करने, लंबे समय से खेती कर रहे किसानों को जमीन का अधिकार देने तथा अधिग्रहण से प्रभावित परिवारों के लिए उचित मुआवजा और पुनर्वास सुनिश्चित करने की मांग की। तीन फसली और कृषि योग्य भूमि के अधिग्रहण पर रोक तथा भूमि अधिग्रहण कानून-2013 को सख्ती से लागू करने की बात भी कही गई।

किसानों के लिए मासिक पेंशन, कृषि ऋण माफी, उचित मूल्य पर खाद-बीज और धान का खरीद मूल्य 3,200 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग उठाई गई। प्रदर्शनकारियों ने मजदूरों, युवाओं और महिलाओं का पलायन रोकने के लिए खनिज आधारित उद्योग स्थापित करने, स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़ाने, कृषि को उद्योग का दर्जा देने और हर खेत तक पानी पहुंचाने पर भी जोर दिया।

बंद समर्थकों ने झारखंडी भाषा-संस्कृति और जल, जंगल व जमीन की रक्षा का मुद्दा भी उठाया। उनकी अन्य मांगों में शिक्षा एवं स्वास्थ्य के बाजारीकरण पर रोक, जमीन के रिकॉर्ड से छेड़छाड़ रोकना, ऑनलाइन व्यवस्था के साथ मैनुअल रसीद जारी रखना और स्थानीय भाषाओं के अनुरूप प्राथमिक शिक्षा की व्यवस्था करना शामिल रहा। प्रदर्शन के दौरान रखी गई ये बातें आंदोलनकारी संगठनों की मांगें हैं।