लातेहार जिले के बरवाडीह क्षेत्र में ऐतिहासिक पलामू किला और कमलदह झील तक जाने वाले वाहनों से 1,950 रुपये शुल्क लेने की व्यवस्था का विरोध तेज हो गया है। ग्रामीणों ने शुल्क वसूली के लिए लगाए गए बैरियर को हटाने और पूरी व्यवस्था पर दोबारा विचार करने की मांग की है।
रिपोर्ट के मुताबिक, वन विभाग ने प्रति वाहन 1,950 रुपये का शुल्क निर्धारित किया है। नई व्यवस्था में पंजीकृत जंगल सफारी वाहनों से ही किले तक जाने की अनुमति मिलने की बात भी सामने आई है। ग्रामीणों का कहना है कि पहले लोग बाइक, ऑटो, चारपहिया वाहन और मिनी बस से आसानी से इस क्षेत्र में पहुंचते थे।
विरोध कर रहे लोगों ने आशंका जताई है कि अधिक शुल्क के कारण पलामू किला और कमलदह झील आने वाले पर्यटकों की संख्या प्रभावित हो सकती है। उनका कहना है कि पलामू किला ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व का स्थल है, इसलिए यहां पहुंचने की व्यवस्था सहज रहनी चाहिए।
ग्रामीणों के अनुसार, पर्यटकों की आवाजाही घटने का असर आसपास की स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है। उन्होंने विशेष रूप से दुकानदारों, गाइडों, होटल संचालकों और सफारी वाहन चालकों की आजीविका प्रभावित होने की आशंका जाहिर की है।
संयुक्त ग्रामसभा मंच के नेतृत्व में ग्रामीणों ने संबंधित अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर शुल्क और आवागमन की व्यवस्था में बदलाव की मांग रखी है। मंच ने कहा है कि सकारात्मक पहल नहीं होने पर बरवाडीह तथा आसपास के गांवों में बैठक कर आगे के आंदोलन की रणनीति बनाई जाएगी।
मंच ने जरूरत पड़ने पर बेतला नेशनल पार्क के मुख्य द्वार और पलामू किला मार्ग पर प्रदर्शन करने की चेतावनी भी दी है। स्थानीय विधायक रामचंद्र सिंह ने पलामू टाइगर रिजर्व के अधिकारियों को पत्र भेजकर शुल्क व्यवस्था पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया है। उपलब्ध विवरण में विभाग की ओर से ग्रामीणों की मांग पर किसी निर्णय की जानकारी नहीं दी गई है।