सरायकेला-खरसावां जिले में मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने, खेती का अनावश्यक खर्च घटाने और जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए ‘खेत बचाओ अभियान’ शुरू किया गया है। भारत सरकार के कृषि मंत्रालय की पहल पर चलाया जा रहा यह अभियान 30 नवंबर तक जारी रहेगा। इसकी शुरुआत गम्हरिया से की गई है।
अभियान के तहत किसानों को बताया जाएगा कि अधिक मात्रा में खाद का इस्तेमाल अच्छी उपज की गारंटी नहीं है। इसके बजाय खेत की मिट्टी की वास्तविक जरूरत के अनुसार पोषक तत्वों और उर्वरकों का संतुलित उपयोग करने पर जोर दिया जाएगा। इससे मिट्टी की गुणवत्ता को लंबे समय तक बनाए रखने में मदद मिलने की उम्मीद है।
जागरूकता गतिविधियों में पशुपालन विभाग, मृदा संरक्षण विभाग, जेएसएलपीएस और एसपीओ के साथ संबंधित विभागों के कर्मियों को शामिल किया गया है। बीटीएम, एटीएम, किसान मित्र और उद्यान मित्र भी किसानों तक खेती से जुड़ी उपयोगी जानकारी पहुंचाने में सहयोग करेंगे।
विभागीय कर्मी गांवों में किसानों को जैविक एवं प्राकृतिक खेती, पोषक तत्वों के बेहतर प्रबंधन और रासायनिक खाद पर अनावश्यक निर्भरता कम करने के उपाय बताएंगे। अभियान का उद्देश्य खेती को ऐसी पद्धतियों से जोड़ना है, जिनसे मिट्टी की सेहत सुरक्षित रहे और बढ़ते खर्च को नियंत्रित किया जा सके।
वर्षा जल संचयन भी अभियान का प्रमुख हिस्सा है। किसानों को बारिश के पानी को संरक्षित करने और बाद में कृषि कार्य में उसका उपयोग करने के तरीकों के प्रति जागरूक किया जाएगा। जल संरक्षण के साथ प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए भी उन्हें प्रेरित किया जाएगा।
अभियान के माध्यम से कृषि संबंधी जानकारी गांव-गांव पहुंचाने की योजना है। इसकी सफलता किसानों की भागीदारी और बताए गए उपायों को खेतों में अपनाने पर निर्भर करेगी। मिट्टी और पानी के संरक्षण पर केंद्रित यह पहल जिले में टिकाऊ खेती की दिशा में एक संगठित प्रयास है।