पलामू के बैरांव विद्यालय तक पक्की सड़क नहीं, बारिश में कीचड़ से पढ़ाई प्रभावित

हुसैनाबाद प्रखंड के बैरांव स्थित सरकारी विद्यालय तक पहुंचने वाला कच्चा रास्ता बारिश में कीचड़ से भर जाता है। अभिभावकों और विद्यालय प्रबंधन ने पक्की सड़क बनवाने की मांग की है।

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पलामू के बैरांव विद्यालय तक जाने वाला बारिश से कीचड़ भरा कच्चा रास्ता

पलामू जिले के हुसैनाबाद प्रखंड में राजकीय उत्क्रमित मध्य विद्यालय बैरांव तक जाने वाला कच्चा रास्ता बरसात में विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए बड़ी परेशानी बन गया है। बारिश के बाद रास्ते पर कीचड़ जमा होने से पैदल चलना कठिन हो जाता है। इसका असर बच्चों की विद्यालय में उपस्थिति और नियमित पढ़ाई पर भी पड़ रहा है।

बैरांव पंचायत के बैरांव गांव में स्थित यह विद्यालय हुसैनाबाद अनुमंडल मुख्यालय से करीब आठ किलोमीटर दक्षिण में है। विद्यालय की स्थापना वर्ष 1956 में हुई थी, लेकिन करीब 70 वर्ष बाद भी परिसर तक पहुंचने के लिए पक्की सड़क नहीं बन सकी है। यहां पहली से आठवीं कक्षा तक पढ़ाई होती है और आसपास के कई गांवों के बच्चे आते हैं।

विद्यालय में एक सरकारी शिक्षक, पांच सहायक शिक्षक और एक कंप्यूटर शिक्षक कार्यरत हैं। परिसर में कुल 12 कमरे हैं। उपलब्ध शैक्षणिक व्यवस्था के बावजूद खराब पहुंच मार्ग विद्यार्थियों के लिए बाधा बना हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, बारिश के दिनों में बाइक और साइकिल चलाना कठिन होने के साथ पैदल आने वाले बच्चों के फिसलने का खतरा भी रहता है।

अभिभावकों का कहना है कि कीचड़ से बच्चों के जूते-चप्पल और यूनिफॉर्म गंदे हो जाते हैं। छोटे विद्यार्थियों को रास्ता पार करने में अधिक परेशानी होती है, इसलिए कई परिवार बरसात के दौरान बच्चों को विद्यालय भेजने को लेकर चिंतित रहते हैं। विद्यालय में कार्यरत एक दिव्यांग शिक्षक को भी प्रतिदिन इसी रास्ते से गुजरना पड़ता है।

विद्यालय के लिए जमीन बैरांव टोला खेकसाही निवासी जगदेव महतो ने दान दी थी। लंबे समय तक विद्यार्थी पगडंडी से विद्यालय आते रहे। कुछ महीने पहले स्थानीय रैयतों ने जमीन देकर और श्रमदान से मिट्टी भरकर रास्ते को चौड़ा किया था, लेकिन बारिश होने के बाद उसकी स्थिति फिर खराब हो गई।

पलामू दिव्यांग संघ के अध्यक्ष उमेश कुमार मेहता, विद्यालय प्रबंधन समिति के अध्यक्ष राकेश कुमार मेहता और अभिभावकों ने संबंधित विभाग से जल्द समाधान की मांग की है। उनका कहना है कि विद्यालय तक सुगम और स्थायी पहुंच मार्ग बनने से बच्चों तथा शिक्षकों की आवाजाही सुरक्षित होगी और बरसात में पढ़ाई पर पड़ने वाला असर कम किया जा सकेगा।