पलामू के सखी वन स्टॉप सेंटर में 783 मामले पहुंचे, 764 का निष्पादन

पलामू में 2019 से संचालित सखी वन स्टॉप सेंटर हिंसा और सामाजिक प्रताड़ना से प्रभावित महिलाओं को आश्रय, कानूनी सहायता तथा पारिवारिक मध्यस्थता उपलब्ध करा रहा है।

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पलामू में संचालित सखी वन स्टॉप सेंटर से संबंधित प्रतिनिधि दृश्य

पलामू में संकट, हिंसा या सामाजिक प्रताड़ना का सामना कर रही महिलाओं और लड़कियों के लिए संचालित सखी वन स्टॉप सेंटर ने 2019 से अब तक 783 मामले प्राप्त किए हैं। केंद्र की केंद्रीय प्रशासक श्वेता शर्मा के मुताबिक, इनमें से 764 मामलों का निष्पादन किया जा चुका है। केंद्र जरूरत के अनुसार आश्रय, कानूनी सहायता और पारिवारिक मध्यस्थता उपलब्ध कराता है।

उपलब्ध विवरण के अनुसार, 2019 के बाद केंद्र ने 183 महिलाओं को अस्थायी आश्रय दिया। इनमें 174 महिलाओं को उनके परिवारों से मिलाया गया। जिन महिलाओं के पास रहने की जगह नहीं होती, वे केंद्र में पांच दिन तक रह सकती हैं। अधिक समय तक आश्रय की आवश्यकता होने पर उन्हें स्वधार गृह भेजने की व्यवस्था है।

सखी वन स्टॉप सेंटर चौबीस घंटे काम करता है। सहायता की जरूरत वाली महिला 181 नंबर पर कॉल कर सकती है या सीधे केंद्र से संपर्क कर सकती है। घरेलू हिंसा सहित दूसरे प्रकार के उत्पीड़न से प्रभावित महिलाओं को यहां कानूनी सलाह दी जाती है। परिस्थिति अनुकूल होने पर परिवार के सदस्यों के बीच बातचीत और मध्यस्थता भी कराई जाती है।

केंद्र ने अलग-अलग राज्यों से जुड़ी महिलाओं और लड़कियों को परिवार तक पहुंचाने में भी भूमिका निभाई है। उपलब्ध मामलों में बिहार के औरंगाबाद की एक मूक-बधिर युवती को उसके परिजनों से मिलाना और राजस्थान के अलवर की एक युवती के परिवार का पता लगाकर उसे वापस पहुंचाना शामिल है। एक अन्य मामले में वैवाहिक विवाद के बाद दोनों परिवारों के बीच समझौता कराया गया।

केंद्र में पहुंचने वाले मामलों का रिकॉर्ड भी तैयार किया जाता है। इनमें नाबालिगों, साइबर अपराध से प्रभावित महिलाओं और घरेलू प्रताड़ना से जुड़े प्रकरण शामिल हैं। जरूरत का आकलन करने के बाद संबंधित महिला को सामाजिक या कानूनी सहायता उपलब्ध कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाती है।

पलामू में इस केंद्र का संचालन परिवार एवं समाज कल्याण विभाग की जिम्मेदारी के तहत किया जा रहा है। जिला विधिक सेवा प्राधिकार और जिला समाज कल्याण कार्यालय इसकी निगरानी तथा सहायता में जुड़े हैं। वन स्टॉप सेंटर योजना की शुरुआत 2015 में निर्भया फंड के तहत की गई थी, जबकि पलामू में इसका संचालन 2019 से हो रहा है।