पलामू में सरकारी कार्यक्रमों के अतिथियों का स्वागत अब पारंपरिक गुलदस्तों के बजाय स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं द्वारा तैयार हस्तनिर्मित कला और शिल्प की वस्तुओं से करने की योजना है। जिला प्रशासन ने झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (जेएसएलपीएस) के साथ मिलकर यह पहल तैयार की है। इसका उद्देश्य स्थानीय हस्तशिल्प को प्रोत्साहन देने के साथ महिलाओं के लिए स्वरोजगार के अवसर बढ़ाना है।
योजना के तहत हस्तनिर्मित वस्तुएं बनाने में रुचि रखने वाली महिलाओं को अभियान से जोड़ा जाएगा। जेएसएलपीएस शुरुआत में उन्हें आवश्यक प्रशिक्षण देगा। प्रशिक्षण के बाद काम को आगे बढ़ाने और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए ऋण उपलब्ध कराने में भी सहायता दी जाएगी।
पलामू में फिलहाल 21,528 स्वयं सहायता समूहों से 2,25,780 महिलाएं जुड़ी हुई हैं। प्रस्तावित पहल में इसी व्यापक नेटवर्क का उपयोग किया जाएगा। तैयार वस्तुओं को बाजार दिलाने की जिम्मेदारी भी योजना का हिस्सा है, ताकि प्रशिक्षण के बाद उत्पाद बनाने वाली महिलाओं के सामने बिक्री की समस्या न रहे।
हस्तशिल्प उत्पादों का प्रारंभिक उपयोग सरकारी कार्यक्रमों में अतिथियों के स्वागत और उन्हें भेंट देने के लिए किया जाएगा। आगे चलकर इन वस्तुओं को राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित विभिन्न मेलों में भेजने की योजना है। उत्पादों के उपयोग और प्रचार को व्यवस्थित करने के लिए जिले के अलग-अलग विभागों के बीच समन्वय बनाया गया है।
शाहपुर की मधुरज प्रिया को इस अभियान में रोल मॉडल और प्रशिक्षक के रूप में जोड़ने की तैयारी है। बीएड की पढ़ाई कर चुकीं मधुरज ने यूट्यूब और सोशल मीडिया की मदद से कला एवं शिल्प बनाना सीखा और बाद में इसमें दक्षता हासिल की। जेएसएलपीएस के अधिकारियों ने उनका काम देखने के बाद दूसरी महिलाओं को प्रशिक्षण देने के लिए उनसे संपर्क किया।
प्रशासन और जेएसएलपीएस की यह पहल सरकारी आयोजनों में स्थानीय उत्पादों की नियमित मांग तैयार करने का प्रयास है। प्रशिक्षण, ऋण सहायता और बाजार उपलब्ध कराने की प्रस्तावित व्यवस्था लागू होने पर स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी इच्छुक महिलाओं को अपने कौशल को स्वरोजगार में बदलने का अवसर मिल सकेगा।