सीजीएल भर्ती मामले की एसआईटी जांच पर हाईकोर्ट की निगरानी, सेवानिवृत्त न्यायाधीश नियुक्त

झारखंड हाईकोर्ट ने रद्द की गई सीजीएल चयन प्रक्रिया से जुड़े मामलों में सीआईडी की एसआईटी जांच की निगरानी के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश गौतम कुमार चौधरी को ऑब्जर्वर नियुक्त किया है।

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रांची स्थित झारखंड हाईकोर्ट से संबंधित सीजीएल भर्ती जांच की सांकेतिक तस्वीर

रांची में झारखंड हाईकोर्ट ने रद्द की गई सीजीएल नियुक्ति प्रक्रिया से संबंधित मामलों की सुनवाई के दौरान सीआईडी की विशेष जांच टीम की जांच पर स्वतंत्र निगरानी की व्यवस्था की है। अदालत ने हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश गौतम कुमार चौधरी को मॉनिटर यानी ऑब्जर्वर नियुक्त किया है।

जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने 17 से अधिक याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया। इन याचिकाओं में राज्य सरकार की उन अधिसूचनाओं को चुनौती दी गई है, जिनसे पूरी विज्ञापन और चयन प्रक्रिया रद्द कर दी गई थी। इस निर्णय के बाद नियुक्त अभ्यर्थियों की सेवाएं भी समाप्त हो गई थीं।

सुनवाई में कुछ याचिकाकर्ताओं ने शिकायत रखी कि जांच कर रही एसआईटी निर्दोष अभ्यर्थियों को भी नोटिस या समन जारी कर रही है और उन पर दबाव बनाया जा रहा है। अदालत ने कहा कि केवल समन जारी होना अपने आप में उत्पीड़न नहीं माना जा सकता। हालांकि, वास्तविक अभ्यर्थियों की आशंकाएं दूर करने और निष्पक्षता बनाए रखने के लिए स्वतंत्र निगरानी जरूरी है।

आदेश के अनुसार, किसी अभ्यर्थी को जांच के दौरान उत्पीड़न की शिकायत हो तो वह सेवानिवृत्त न्यायाधीश के समक्ष अपनी बात रख सकता है। शिकायत सही पाए जाने पर इसकी जानकारी एसआईटी प्रमुख को दी जाएगी और आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे। समन पाने वाले अभ्यर्थियों को जांच में पूरा सहयोग करना होगा।

राज्य सरकार ने अपने शपथपत्र में दावा किया कि परीक्षा की पूरी प्रक्रिया दूषित हो चुकी थी और सही तथा गलत तरीके से सफल अभ्यर्थियों को अलग करना संभव नहीं था। सरकार के अनुसार, गोपनीय परीक्षा कार्य संभालने वाली एजेंसी से जुड़े लोगों ने बड़े स्तर पर गड़बड़ी की। मामले में सीईओ समेत 28 लोगों की गिरफ्तारी और 265 लोगों को नोटिस जारी किए जाने की जानकारी भी अदालत को दी गई।

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि मॉनिटर की नियुक्ति से एसआईटी की स्वतंत्र जांच प्रभावित नहीं होगी। इस व्यवस्था को जांच में हस्तक्षेप या उसके खिलाफ प्रतिकूल टिप्पणी नहीं माना जाएगा। प्रार्थियों को राज्य सरकार के जवाब पर प्रति-उत्तर दाखिल करने का समय देते हुए अदालत ने अगली सुनवाई सात अक्टूबर को तय की है।