लातेहार जिले में झारखंड-छत्तीसगढ़ सीमा से लगे पलामू टाइगर रिजर्व के दमचुआ जंगल में वन विभाग की टीम ने करीब 200 फीट लंबा जंग लगा फंदा और पांच तीर बरामद किए हैं। अधिकारियों को आशंका है कि इनका इस्तेमाल वन्यजीवों के शिकार के लिए किया जाना था। इस संबंध में अज्ञात आरोपियों के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई है।
यह कार्रवाई टाइगर रिजर्व के दक्षिणी प्रभाग में की गई। महुआडांड के प्रभारी रेंजर गुरुदयाल सिंह के अनुसार, फंदे और तीर ऐसे क्षेत्र में लगाए गए थे जहां जंगली सूअरों और खरगोशों की आवाजाही रहती है। वन विभाग का अनुमान है कि त्योहारी समय में मांस की मांग को देखते हुए शिकार की तैयारी की गई होगी। हालांकि, जांच पूरी होने तक इस आशंका की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
बरामद सामग्री मौसम के असर से जर्जर और जंग लगी बताई गई है। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक, शिकारी पकड़े जाने से बचने के लिए बंदूकों के बजाय फंदे और तीर जैसे साधनों का उपयोग कर सकते हैं। गोली की आवाज नहीं होने के कारण गश्ती दल और आसपास मौजूद वन्यजीवों को तत्काल भनक लगने की संभावना कम रहती है।
दक्षिणी प्रभाग के उप निदेशक कुमार आशीष ने बताया कि गारू पश्चिम, गारू पूर्व, बारेसांर और महुआडांड रेंज में विशेष गश्ती दल तैनात किए गए हैं। प्रत्येक दल में तीन वन रक्षक और 12 फॉरेस्ट ट्रैकर शामिल हैं। शिकारियों को निगरानी के समय का अनुमान न हो, इसके लिए गश्त का समय लगातार बदला जा रहा है।
दक्षिणी प्रभाग में कुल 62 वन रक्षक हैं। इनमें से 31 फिलहाल रांची और चाईबासा में प्रशिक्षण पर हैं। अधिकारियों का कहना है कि उपलब्ध बल के बीच कर्मचारियों को पर्याप्त विश्राम देते हुए जंगल में हर घंटे निगरानी सुनिश्चित करने की व्यवस्था की गई है।
वन विभाग ने त्योहारी अवधि को देखते हुए जंगलों में सतर्कता बढ़ा दी है। बरामद फंदों और तीरों को किसने लगाया, फिलहाल इसका पता नहीं चला है। दर्ज मामले के आधार पर जिम्मेदार लोगों की पहचान और घटना से जुड़े अन्य तथ्यों की जांच आगे बढ़ाई जा रही है।