पलामू टाइगर रिजर्व के हाथी दल में कर्नाटक से लाए जाने वाले दो प्रशिक्षित कुमकी हाथियों को शामिल करने की तैयारी है। अभी रिजर्व के दल में चार हाथी हैं। नए हाथियों के आने के बाद इनकी संख्या छह हो जाएगी। इनका उपयोग मानव-हाथी संघर्ष से निपटने और वन्यजीवों के बचाव अभियानों में किया जाएगा।
झारखंड वन विभाग ने कर्नाटक से कुल छह पालतू एवं विशेष रूप से प्रशिक्षित हाथी लाने की योजना बनाई है। इनमें से दो को पलामू टाइगर रिजर्व में तैनात किया जाना है। कुमकी ऐसे प्रशिक्षित हाथी होते हैं, जिनकी सहायता जंगली हाथियों के झुंड को नियंत्रित करने, उन्हें आबादी वाले क्षेत्र से दूर करने और बचाव कार्यों में ली जाती है।
पलामू टाइगर रिजर्व के उपनिदेशक प्रजेशकांत जेना के अनुसार, प्रस्तावित कुमकी हाथी उन इलाकों तक पहुंचने में भी उपयोगी होंगे जहां सामान्य साधनों से जाना कठिन होता है। आवश्यकता पड़ने पर बाघ सहित दूसरे वन्यजीवों के रेस्क्यू अभियान में भी उनकी मदद ली जा सकेगी। दोनों हाथियों को मानव-हाथी संघर्ष अनुसंधान केंद्र में रखने की योजना है।
रिजर्व में इससे पहले 2016-17 के दौरान कर्नाटक के बांदीपुर से सीता और मुर्गेश नाम के दो हाथी लाए गए थे। करीब एक दशक बाद फिर कर्नाटक से प्रशिक्षित हाथियों को लाने की पहल की गई है। विभाग की योजना में इनकी भूमिका केवल गश्त तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि संघर्ष प्रबंधन और वन्यजीव सहायता कार्य भी प्रमुख होंगे।
पलामू किला क्षेत्र में लगभग 20 एकड़ में मानव-हाथी संघर्ष पर केंद्रित एक समर्पित अनुसंधान केंद्र भी तैयार किया जा रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, केंद्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित तकनीक के इस्तेमाल की भी योजना है। यहां संघर्ष के विभिन्न पहलुओं का अध्ययन करने के साथ व्यावहारिक समाधान विकसित करने पर काम किया जाएगा।
अनुसंधान केंद्र में रिजर्व के मौजूदा चार हाथियों के साथ कर्नाटक से आने वाले दोनों कुमकी हाथियों को रखने की तैयारी है। इससे प्रशिक्षण, मैदानी कार्रवाई और अध्ययन को एक ही व्यवस्था से जोड़ने की संभावना बनेगी। हालांकि, हाथियों के पलामू पहुंचने की निश्चित तारीख का उल्लेख उपलब्ध विवरण में नहीं किया गया है।