नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय ने पलामू, गढ़वा और लातेहार में उच्च शिक्षा से दूर हो रहे आदिवासी, गरीब और कामकाजी छात्रों की पहचान के लिए विशेष सर्वे की पहल की है। विश्वविद्यालय ने इस काम के लिए रांची विश्वविद्यालय और विनोबा भावे विश्वविद्यालय से आंकड़े मांगे हैं। तीनों संस्थानों के सहयोग से सर्वे के लिए एक विशेष टीम भी बनाई गई है।
योजना के तहत आदिवासी आबादी वाले क्षेत्रों, औद्योगिक इलाकों और आर्थिक कारणों से पढ़ाई जारी नहीं रख पाने वाले विद्यार्थियों की जानकारी जुटाई जाएगी। ऐसे युवाओं को नजदीकी कॉलेज में पढ़ने का अवसर देने पर विचार है। सर्वे में चिह्नित क्षेत्रों के छात्रों के लिए सीट निर्धारित करने और जरूरत के अनुसार शाम की कक्षाएं चलाने की योजना भी है।
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर डॉ. दिनेश कुमार सिंह के अनुसार, काम करने के साथ पढ़ाई जारी रखने के इच्छुक विद्यार्थियों का भी डाटा लिया जाएगा। किसी क्षेत्र में 200 या 500 संभावित विद्यार्थी मिलने जैसी स्थिति में वहां इवनिंग कक्षाओं की व्यवस्था की जा सकती है। यह सुविधा सर्वे के आधार पर चुने गए इलाकों तक सीमित रहेगी।
एनपीयू के अधीन पलामू, गढ़वा और लातेहार में 19 डिग्री कॉलेज हैं, फिर भी कई क्षेत्रों के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। उपलब्ध विवरण के मुताबिक बालूमाथ के छात्रों को स्नातक या स्नातकोत्तर पढ़ाई के लिए 60 से 70 किलोमीटर, भंडरिया के छात्रों को 40 से 50 किलोमीटर और पांडु, हरिहरगंज तथा मनातू के विद्यार्थियों को 70 से 80 किलोमीटर तक जाना पड़ता है। बालूमाथ में डिग्री कॉलेज खोलने की अनुमति मिल चुकी है, जबकि अन्य क्षेत्रों में भी कॉलेज खोलने की तैयारी बताई गई है।
विश्वविद्यालय के पुराने आंकड़े पढ़ाई बीच में छोड़ने की चुनौती भी दिखाते हैं। स्नातक सत्र 2021-24 में 8,995 छात्र आगे की प्रक्रिया से गायब मिले थे, जिसके बाद विश्वविद्यालय ने जांच और सर्वे कराया था। इसमें नामांकन के बाद कॉलेज नहीं आने, परीक्षा फॉर्म नहीं भरने और पलायन जैसे मामले सामने आए थे।
विश्वविद्यालय ने 2025 में मेदिनीनगर के जीएलए कॉलेज और महिला कॉलेज में इवनिंग कक्षाओं की योजना बनाई थी, जिस पर क्रियान्वयन जारी बताया गया है। नया सर्वे अब यह निर्धारित करने में मदद करेगा कि किन क्षेत्रों में दूरी, रोजगार या आर्थिक परिस्थितियों के कारण विद्यार्थियों को वैकल्पिक कक्षा व्यवस्था और नजदीकी कॉलेज में स्थान की सबसे अधिक जरूरत है।