पलामू में माओवादी नितेश यादव और उसके दस्ते के खिलाफ कार्रवाई के लिए झारखंड तथा बिहार के सुरक्षा बलों की संयुक्त टास्क फोर्स बनाई गई है। विशेष बलों को दोनों राज्यों के सीमावर्ती क्षेत्रों में तैनात कर तलाशी अभियान चलाया जा रहा है। पुलिस का कहना है कि नितेश की गतिविधियों और उसके दस्ते को मिलने वाली सहायता से जुड़ी सूचनाओं के आधार पर यह कार्रवाई की जा रही है।
संयुक्त टीम में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल, सीमा सुरक्षा बल, बिहार स्पेशल टास्क फोर्स, झारखंड जगुआर, आईआरबी, जैप और जिला बल को शामिल किया गया है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक नितेश का दस्ता झारखंड के पलामू और चतरा तथा बिहार के गया और औरंगाबाद से लगते क्षेत्रों में सक्रिय बताया जाता है।
झारखंड सरकार ने नितेश पर 15 लाख रुपये और बिहार सरकार ने तीन लाख रुपये का इनाम घोषित कर रखा है। उसकी तलाश राष्ट्रीय जांच एजेंसी भी कर रही है। दस्ते में संजय गोदराम उर्फ संजय यादव और ठेगन मियां के शामिल होने की बात कही गई है। संजय पर 10 लाख रुपये का इनाम होने की जानकारी भी दी गई है।
सुरक्षा बलों की पड़ताल में एक दर्जन से अधिक गांवों को चिह्नित किए जाने का दावा किया गया है। ये गांव पलामू, चतरा, गया और औरंगाबाद के सीमावर्ती इलाकों में स्थित बताए गए हैं। पुलिस के अनुसार, हुसैनाबाद की महूदंड पंचायत के आसपास नितेश की हालिया सक्रियता से संबंधित सूचनाएं लगातार मिल रही थीं।
पुलिस ने 25 से अधिक ऐसे लोगों की पहचान करने की बात कही है, जिन पर दस्ते के लिए लेवी वसूली, सामान उपलब्ध कराने अथवा अन्य प्रकार की मदद करने का संदेह है। इस सूची में कुछ कारोबारियों और प्रभावशाली लोगों के भी होने का दावा किया गया है। ये आरोप अभी पुलिस की जांच और आगामी कार्रवाई के दायरे में हैं।
पलामू के डीआईजी किशोर कौशल के अनुसार, अभियान बिहार और झारखंड दोनों ओर चलाया जा रहा है। पुलिस ने माओवादी दस्ते की सहायता करने वालों को कार्रवाई की चेतावनी दी है। सीमावर्ती क्षेत्र जंगलों और पहाड़ियों से घिरा होने तथा संचार नेटवर्क कमजोर रहने के कारण सुरक्षा बलों के लिए अभियान चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है।