पलामू सदर अस्पताल में 33 जन्म प्रमाणपत्र फर्जी तरीके से जारी, प्राथमिकी दर्ज

अस्पताल उपाधीक्षक के डिजिटल हस्ताक्षर के कथित दुरुपयोग से 33 जन्म प्रमाणपत्र जारी करने का मामला सामने आया है। सभी प्रमाणपत्र रद्द कर पुलिस जांच शुरू की गई है।

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पलामू सदर अस्पताल में जन्म प्रमाणपत्र से जुड़ी कथित गड़बड़ी का मामला

पलामू के सदर अस्पताल में कथित रूप से फर्जी तरीके से 33 जन्म प्रमाणपत्र जारी करने का मामला सामने आया है। गड़बड़ी का पता चलने के बाद सभी संबंधित प्रमाणपत्र रद्द कर दिए गए हैं। अस्पताल उपाधीक्षक के आवेदन पर मेदिनीनगर टाउन थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई है और पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।

प्राथमिकी के अनुसार, अस्पताल उपाधीक्षक डॉ. विजय कुमार के डिजिटल हस्ताक्षर का गलत इस्तेमाल कर ये प्रमाणपत्र बनाए गए थे। मेदिनीनगर टाउन थाना प्रभारी ज्योतिलाल रजवार ने अस्पताल उपाधीक्षक के आवेदन के आधार पर मामला दर्ज किए जाने की जानकारी दी है। थाने में इसे कांड संख्या 351/2026 के रूप में दर्ज किया गया है।

अस्पताल में जन्म प्रमाणपत्र तैयार करने के लिए कंप्यूटर ऑपरेटर अमित कुमार को नियुक्त किया गया है। प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया में उपाधीक्षक के डिजिटल हस्ताक्षर की आवश्यकता होती है। जांच के दौरान सामने आया कि इसी व्यवस्था का दुरुपयोग कर 33 प्रमाणपत्र निर्गत किए गए और उनका वितरण भी कर दिया गया।

प्राथमिकी में दर्ज विवरण के मुताबिक, काम का दबाव अधिक होने के कारण अस्पताल प्रबंधक ने बिश्रामपुर निवासी शिवनारायण साव को जन्म प्रमाणपत्र से संबंधित पोर्टल की आईडी उपलब्ध कराई थी। बाद में उनके कार्यकाल के दौरान किए गए काम की जांच कराई गई, जिसमें कथित अनियमितता का पता चला।

मामला उजागर होने के बाद अस्पताल प्रशासन ने प्रभावित सभी प्रमाणपत्र निरस्त कर दिए। पुलिस अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि प्रमाणपत्र तैयार करने और जारी करने की प्रक्रिया में किन लोगों की भूमिका रही तथा जिनके नाम पर दस्तावेज बने, वे कहां के निवासी हैं।

फिलहाल प्राथमिकी में दर्ज तथ्यों के आधार पर जांच आगे बढ़ रही है। किसी व्यक्ति की अंतिम जिम्मेदारी अभी निर्धारित नहीं की गई है। पुलिस जांच से ही स्पष्ट होगा कि डिजिटल हस्ताक्षर तक पहुंच कैसे बनी, पोर्टल का इस्तेमाल किस स्तर पर हुआ और प्रमाणपत्रों के वितरण में कौन-कौन शामिल था।