पश्चिमी सिंहभूम के दो दृष्टिबाधित युवाओं शेखर गोप और धीरज कुम्हार ने हिमालय में 20,500 फीट की ऊंचाई तक पहुंचकर पर्वतारोहण अभियान पूरा किया। सात सदस्यीय दल में शामिल दोनों युवाओं ने 31 अगस्त की सुबह जो जोंगो चोटी तक का सफर तय किया। अभियान के दौरान दो महिला पर्वतारोही भी दल का हिस्सा थीं।
रिपोर्ट के अनुसार, 24 वर्षीय शेखर और 23 वर्षीय धीरज बचपन से पूरी तरह दृष्टिबाधित हैं। दोनों ने गांव में नियमित अभ्यास के सहारे चलना सीखा। बाद में वे टाटा स्टील फाउंडेशन की ‘सबल’ पहल से जुड़े। शेखर वर्ष 2019 और धीरज वर्ष 2022 में इस पहल का हिस्सा बने थे।
इस पहल के तहत दोनों युवाओं को ब्रेल लिपि से पढ़ने-लिखने, फुटबॉल खेलने तथा बिना किसी सहारे के चलने का प्रशिक्षण मिला। उन्होंने कंप्यूटर और मोबाइल का इस्तेमाल भी सीखा। पर्वतारोहण की तैयारी के लिए उन्हें टूपुंग, उत्तरकाशी और दलमा की पहाड़ियों में प्रशिक्षण दिया गया, जहां उनकी शारीरिक क्षमता, सहनशक्ति और मानसिक तैयारी पर काम हुआ।
अभियान का सफर 25 अगस्त 2026 को लेह से सारा के लिए शुरू हुआ। इसके बाद दल सारा से उमलूंग, उमलूंग से थूचुंग और फिर नीमालिंग पहुंचा। उपलब्ध विवरण के मुताबिक, दल 31 अगस्त को सुबह 10 बजकर 30 मिनट पर जो जोंगो चोटी पहुंचा और वहां तिरंगा फहराया।
ऊंचाई की ओर बढ़ते समय धीरज की तबीयत बिगड़ी, लेकिन वे अभियान में बने रहे। शेखर ने पूरी निर्धारित ऊंचाई तक पहुंचकर अपना लक्ष्य पूरा किया। दुर्गम रास्ते में दल के सदस्य बीजू मुर्मू और सुनीता सोरेन ने दिशा बताने और दोनों युवाओं को सुरक्षित आगे बढ़ाने में सहयोग किया।
अभियान से पहले मिले चरणबद्ध प्रशिक्षण और टीम के सहयोग ने दोनों युवाओं की यात्रा में अहम भूमिका निभाई। गांव से प्रशिक्षण केंद्रों और फिर हिमालयी चोटी तक पहुंची उनकी यात्रा दृष्टिबाधित युवाओं की खेल एवं साहसिक गतिविधियों में भागीदारी का उल्लेखनीय उदाहरण बनी है।