हजारीबाग के इंद्रलोक टावर में मंगलवार को हुई झारखंड फुटबॉल एसोसिएशन की बैठक में संघों के संचालन और प्रतियोगिताओं से जुड़े कई बदलावों पर सहमति बनी। बैठक की अध्यक्षता एसोसिएशन के उपाध्यक्ष समीर उरांव ने की, जबकि मेजबानी हजारीबाग जिला फुटबॉल संघ ने की। इसमें राज्य के सभी 24 जिलों के अध्यक्ष और सचिव शामिल हुए।
बैठक में केंद्र सरकार की नई गाइडलाइन पर चर्चा के बाद उसके अनुरूप काम करने का निर्णय लिया गया। तय व्यवस्था के अनुसार कोई व्यक्ति एक समय में केवल एक फुटबॉल संघ की सदस्यता रख सकेगा। इसका उद्देश्य विभिन्न संघों में जिम्मेदारियों और सदस्यता की स्थिति को स्पष्ट रखना है।
अध्यक्ष, सचिव या कोषाध्यक्ष के पद पर लगातार 12 वर्ष पूरे करने वाले पदाधिकारी को वह पद छोड़ना होगा। हालांकि, ऐसे पदाधिकारी सामान्य सदस्य के रूप में संघ से जुड़े रह सकेंगे और अपनी सेवाएं जारी रख पाएंगे। बैठक में यह प्रावधान प्रमुख पदों पर कार्यकाल से संबंधित सीमा के रूप में स्वीकार किया गया।
महिला प्रतिनिधित्व को लेकर भी दो स्तरों पर सहमति बनी। 15 सदस्यीय संघ में अध्यक्ष, सचिव और कोषाध्यक्ष के तीन प्रमुख पदों में से कम से कम एक पद पर महिला का होना अनिवार्य किया जाएगा। इसके अतिरिक्त कार्यकारिणी में भी कम से कम एक महिला सदस्य को स्थान देने का निर्णय हुआ।
संघों में अंतरराष्ट्रीय, राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर खेल चुके खिलाड़ियों को प्राथमिकता देने की बात कही गई। वहीं, खिलाड़ियों के लिए राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय या राज्य स्तरीय मुकाबले में उतरने से पहले पोर्टल पर सीआरएस आईडी का पंजीकरण अनिवार्य करने का निर्णय लिया गया।
रेफरी बनने की पात्रता के लिए भी नया मानदंड तय किया गया। राज्य या राष्ट्रीय स्तर का रेफरी बनने के इच्छुक व्यक्ति को अपने जिले में कम से कम 25 लीग मैचों में रेफरिंग करनी होगी। बैठक में गुलाम रब्बानी, मुस्तफा, कलेश्वर, आलोक कुमार, मसूद आलम, शशिकांत शर्मा और दिलीप गोप समेत कई सदस्य उपस्थित थे।