पाकुड़ कोयला खनन मामले में हाईकोर्ट ने एसीबी से मांगा विस्तृत शपथपत्र

पैनम कोल कंपनी से जुड़े कथित अवैध खनन मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने एसीबी को 30 अक्टूबर तक तथ्यवार शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है। अगली सुनवाई 5 नवंबर को होगी।

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पाकुड़ कोयला खनन मामले की सुनवाई से संबंधित सांकेतिक दृश्य

पाकुड़ जिले में पैनम कोल कंपनी से जुड़े कथित अवैध खनन मामले की सुनवाई करते हुए झारखंड हाईकोर्ट ने भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) से विस्तृत जवाब मांगा है। अदालत ने एजेंसी को 30 अक्टूबर तक अपनी जांच और अब तक सामने आए तथ्यों का विवरण शपथपत्र के माध्यम से प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। मामले की अगली सुनवाई 5 नवंबर को निर्धारित की गई है।

सुनवाई के दौरान एसीबी की ओर से अदालत को बताया गया कि प्रारंभिक पड़ताल में करीब 600 करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितता से संबंधित साक्ष्य मिले हैं। एजेंसी के अनुसार, इन्हीं तथ्यों के आधार पर कंपनी और मामले से जुड़े पक्षों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की तैयारी चल रही है। ये निष्कर्ष अभी जांच के चरण में हैं और आरोपों पर अंतिम निर्णय विधिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।

मामला पाकुड़ और दुमका जिलों में कंपनी को आवंटित कोयला खनन पट्टे से जुड़ा है। जनहित याचिका में आरोप लगाया गया है कि स्वीकृत लीज क्षेत्र से बाहर भी कोयले का निष्कासन किया गया, जिससे राज्य सरकार को राजस्व की हानि हुई। इसी शिकायत के आधार पर खनन की सीमा और वित्तीय लेन-देन की जांच की जा रही है।

याचिका में दुमका के प्रमंडल आयुक्त की 19 अक्टूबर 2015 की रिपोर्ट का भी उल्लेख किया गया है। आरोप है कि उस रिपोर्ट के बाद राज्य स्तर पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। मामले पर असंतोष जताते हुए हाईकोर्ट ने पहले इसकी प्रारंभिक जांच की जिम्मेदारी एसीबी को सौंपी थी। अब अदालत ने जांच से जुड़े तथ्यों को क्रमवार तरीके से रिकॉर्ड पर रखने को कहा है।

सुनवाई के दौरान कंपनी के निदेशक की ओर से स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग या प्रतिनिधि के माध्यम से बयान दर्ज कराने का अनुरोध किया गया। अदालत ने कहा कि मौजूदा चरण में निदेशक को जांच एजेंसी के सामने उपस्थित होने की आवश्यकता नहीं है। एसीबी ने भी उनका बयान तत्काल दर्ज कराना अनिवार्य नहीं बताया, जिसके बाद संबंधित आवेदन का निष्पादन कर दिया गया।

अब एसीबी के शपथपत्र से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि प्रारंभिक जांच में किन तथ्यों और दस्तावेजों को आधार बनाया गया है तथा आगे कौन-से विधिक कदम प्रस्तावित हैं। प्राथमिकी दर्ज करने की प्रक्रिया और जांच की प्रगति भी अगली सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष आ सकती है। फिलहाल कंपनी तथा संबंधित पक्षों पर लगाए गए आरोप जांच और न्यायिक विचार के अधीन हैं।