पूर्वी सिंहभूम के पारा शिक्षकों को हाईकोर्ट से राहत, सेवा समाप्ति और मानदेय रोकने का आदेश रद्द

झारखंड हाईकोर्ट ने पूर्वी सिंहभूम के पारा शिक्षकों को सेवा से हटाने और मानदेय रोकने संबंधी जिला शिक्षा अधीक्षक का आदेश निरस्त कर अप्रैल 2025 से बकाया भुगतान का निर्देश दिया है।

2 मिनट पढ़ें 2 बार पढ़ी गई
झारखंड हाईकोर्ट से पूर्वी सिंहभूम के पारा शिक्षकों को मिली राहत

झारखंड हाईकोर्ट ने पूर्वी सिंहभूम के पारा शिक्षकों को राहत देते हुए उनकी सेवा समाप्त करने और मानदेय रोकने का आदेश निरस्त कर दिया है। जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने संबंधित शिक्षकों को अप्रैल 2025 से बकाया मानदेय देने का भी निर्देश दिया। कार्रवाई शैक्षणिक प्रमाणपत्रों की मान्यता पर उठे सवालों के आधार पर की गई थी।

मेरी मुर्मू एवं अन्य शिक्षकों ने जिला शिक्षा अधीक्षक के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। याचिका में सेवा से हटाने का निर्णय रद्द करने के साथ रोके गए मानदेय के भुगतान की मांग की गई थी। सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रखा था।

मामला ऐसे पारा शिक्षकों की शैक्षणिक योग्यता से जुड़ा है, जिन्होंने इलाहाबाद और देवघर के कुछ संस्थानों से मैट्रिक या इंटरमीडिएट के प्रमाणपत्र प्राप्त किए थे। इनमें इंटर प्रयाग महिला विद्यापीठ, हिंदी महिला विद्यापीठ और हिंदी विद्यापीठ जैसे संस्थानों के प्रमाणपत्र शामिल बताए गए हैं। इन संस्थानों की मान्यता को लेकर सवाल उठने के बाद शिक्षकों की अर्हता जांच के दायरे में आई थी।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद ने सात नवंबर 2025 को इन प्रमाणपत्रों के आधार पर कक्षा एक से पांच और कक्षा छह से आठ तक पढ़ाने वाले पारा शिक्षकों के विरुद्ध कार्रवाई से संबंधित पत्र जारी किया था। इसके बाद अलग-अलग जिलों के शिक्षा अधिकारियों ने अधीनस्थ अधिकारियों और विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों को आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए थे।

इसी क्रम में पूर्वी सिंहभूम के जिला शिक्षा अधीक्षक ने संबंधित पारा शिक्षकों को काम से हटाने और उनका मानदेय रोकने का आदेश दिया था। प्रभावित शिक्षकों ने इस निर्णय के विरुद्ध न्यायिक हस्तक्षेप की मांग की। अदालत ने मामले की सुनवाई के बाद जिला स्तर पर जारी दोनों आदेशों को निरस्त कर दिया।

हाईकोर्ट के निर्णय के बाद याचिका दायर करने वाले शिक्षकों की सेवा और लंबित मानदेय से जुड़ी स्थिति स्पष्ट हुई है। अदालत का निर्देश अप्रैल 2025 से बकाया मानदेय के भुगतान पर भी लागू होगा। उपलब्ध विवरण में भुगतान की समयसीमा या आगे की प्रशासनिक प्रक्रिया का उल्लेख नहीं किया गया है।