पोटका-राजनगर सीमा के गांवों में विधानसभा समिति का निरीक्षण, पत्थर खनन की ब्लास्टिंग रोकने का निर्देश

विधानसभा की सरकारी उपक्रम समिति ने केंदमुड़ी और फुफडीह का दौरा कर विस्फोट से बताए गए नुकसान का जायजा लिया। समिति ने सीमा की स्थिति स्पष्ट कर जवाबदेही तय करने को कहा।

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जमशेदपुर क्षेत्र के दौरे पर पहुंची झारखंड विधानसभा की सरकारी उपक्रम समिति ने मंगलवार को पूर्वी सिंहभूम के पोटका प्रखंड स्थित केंदमुड़ी और उससे सटे सरायकेला-खरसावां जिले के राजनगर प्रखंड स्थित फुफडीह गांव का निरीक्षण किया। समिति ने पत्थर खनन के लिए की जा रही ब्लास्टिंग से नुकसान की शिकायतों के बीच मौके की स्थिति देखी और विस्फोट का काम बंद करने का निर्देश दिया।

समिति के सभापति निरल पूर्ति के अनुसार, दोनों गांव दो प्रखंडों और दो जिलों की सीमा पर स्थित हैं तथा संबंधित क्षेत्राधिकार को लेकर भ्रम है। अधिकारियों से सीमा की स्थिति स्पष्ट करने को कहा गया है, ताकि यह तय किया जा सके कि निगरानी और कार्रवाई की जिम्मेदारी किसकी है। फुफडीह के ग्रामीणों ने एक दिन पहले समिति के सामने अपनी शिकायत रखी थी।

स्थल निरीक्षण के दौरान समिति ने गांव के स्कूल की दीवार में गहरी दरारें देखीं। ग्रामीणों ने इन दरारों और दूसरे नुकसान को खनन के लिए किए गए विस्फोटों से जुड़ा बताया है। समिति ने इस स्थिति को गंभीर मानते हुए तत्काल ब्लास्टिंग रोकने को कहा। निरीक्षण के समय पूर्वी सिंहभूम जिला प्रशासन के अधिकारी भी उपस्थित थे।

गांवों का दौरा करने से पहले समिति ने जमशेदपुर के सर्किट हाउस में जिला स्तरीय अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। सभापति निरल पूर्ति की अध्यक्षता में हुई बैठक में समिति सदस्य अमित कुमार यादव और जगत माझी भी शामिल हुए। बैठक में सरकारी उपक्रमों तथा उनसे संबद्ध संस्थानों के कामकाज और प्रगति की जानकारी ली गई।

समिति ने कर्मचारियों और श्रमिकों के वेतन-मजदूरी भुगतान, लंबित देय राशि, सेवा संबंधी मामलों, उपलब्ध कार्यबल और श्रमिक कल्याण के विषयों की समीक्षा की। उपक्रमों के आय-व्यय, राजस्व संग्रह, वित्तीय दायित्वों तथा लंबित देनदारियों पर भी अधिकारियों से विवरण मांगा गया। विभिन्न विभागों की योजनाओं और विकास परियोजनाओं में विलंब के कारणों पर चर्चा हुई।

बैठक में सरकारी परिसंपत्तियों के संरक्षण और बेहतर उपयोग, संसाधनों के प्रबंधन तथा आधारभूत सुविधाओं की आवश्यकताओं पर जोर दिया गया। समिति ने प्रशासनिक एवं तकनीकी अड़चनों के समाधान के साथ लंबित मामलों का नियमानुसार शीघ्र निपटारा करने को कहा। अधिकारियों को कार्यों में पारदर्शिता बनाए रखने और जवाबदेही सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया गया।