सरायकेला-खरसावां जिले के राजनगर प्रखंड स्थित फूफाडीह-बाड़ेडीह के ग्रामीणों की शिकायतों के बाद विधानसभा की सरकारी उपक्रम समिति ने संबंधित खनन और क्रशर का संचालन जांच रिपोर्ट आने तक बंद रखने का निर्देश दिया है। समिति ने हेवी ब्लास्टिंग पर भी रोक लगाने को कहा है। खनन स्थल समीपवर्ती पूर्वी सिंहभूम जिले के पोटका क्षेत्र में स्थित है।
समिति के अध्यक्ष और मझगांव विधायक निरल पूर्ति के साथ मनोहरपुर विधायक जगत माझी तथा बरकट्ठा विधायक अमित कुमार यादव ने मंगलवार को स्थल का निरीक्षण किया। इस दौरान सदस्यों ने ग्रामीणों की समस्याओं की जानकारी ली और लीजधारक से जुड़े दस्तावेजों की जांच की। प्रशासन को मामले की जांच कर रिपोर्ट देने का निर्देश भी दिया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, फूफाडीह-बाड़ेडीह के ग्रामीण लंबे समय से जमीन से पानी के रिसाव, मकानों में दरार आने और घरों के फर्श के नीचे दलदली स्थिति बनने की शिकायत कर रहे हैं। ग्रामीणों ने खनन क्षेत्र से पत्थर छिटककर आबादी की ओर गिरने का मुद्दा भी उठाया था। इन शिकायतों की पुष्टि अब प्रशासनिक जांच और संबंधित अभिलेखों के परीक्षण से होनी है।
निरीक्षण के दौरान सामाजिक प्रभाव आकलन को लेकर भी सवाल सामने आया। उपलब्ध विवरण के मुताबिक, आकलन में मुख्य रूप से पोटका अंचल का उल्लेख है, जबकि सरायकेला-खरसावां के राजनगर अंचल में स्थित फूफाडीह-बाड़ेडीह का नाम शामिल नहीं है। समिति ने इस बिंदु की जांच के लिए जिला प्रशासन से पूरी लीज प्रक्रिया, उससे जुड़े दस्तावेज और सामाजिक प्रभाव आकलन रिपोर्ट उपलब्ध कराने को कहा है।
संचालन और भारी विस्फोट पर अस्थायी रोक से फिलहाल ग्रामीणों को राहत मिलने की संभावना है। हालांकि यह अंतिम निर्णय नहीं है। आगे की स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि जांच में लीज प्रक्रिया, प्रभावित क्षेत्र के आकलन और खनन तथा क्रशर संचालन से संबंधित नियमों के पालन को लेकर क्या तथ्य सामने आते हैं।
जांच में यह भी देखा जाना है कि प्रभावित बताए जा रहे गांव को सामाजिक प्रभाव आकलन में शामिल क्यों नहीं किया गया और ग्रामसभा से लेकर संचालन तक आवश्यक प्रक्रियाएं नियमानुसार पूरी हुईं या नहीं। समिति के निर्देश के बाद प्रशासन से मिलने वाली रिपोर्ट इस विवाद में आगे की कार्रवाई का आधार बनेगी।