झारखंड हाईकोर्ट ने पूर्वी सिंहभूम के पोटका में करीब 24 साल पहले हुए सड़क हादसे से जुड़े मामले में टैंकर चालक अनिल सिंह उर्फ अनिल कुमार सिंह की आपराधिक पुनरीक्षण याचिका खारिज कर दी। अदालत ने निचली अदालत और अपीलीय अदालत से मिली दो वर्ष के सश्रम कारावास तथा कुल छह हजार रुपये जुर्माने की सजा में हस्तक्षेप करने से इनकार किया है।
जस्टिस प्रदीप कुमार श्रीवास्तव की पीठ ने चालक का बेल बांड रद्द कर दिया। अदालत ने उसे दो महीने के भीतर संबंधित निचली अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया है। तय अवधि में आत्मसमर्पण नहीं होने पर ट्रायल कोर्ट को कानून के अनुसार आवश्यक कार्रवाई करने को कहा गया है।
मामले के उपलब्ध विवरण के अनुसार, दुर्घटना 5 नवंबर 2002 को हुई थी और इस संबंध में पोटका थाने में मामला दर्ज किया गया था। बताया गया कि टैंकर की सामने से आ रही एक वैन से टक्कर हो गई थी। हादसे में वैन सवार छह लोगों की मृत्यु हुई थी, जबकि आधा दर्जन से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे।
मृतकों में रामेश्वर मुखी, वैन चालक टुकलू मुखी, रीना मुखी और मनीषा शांडिल के नाम दर्ज हैं। उपलब्ध विवरण में अन्य दो मृतकों और घायलों के नाम नहीं बताए गए हैं। हाईकोर्ट के समक्ष चालक ने पहले के न्यायिक निर्णयों के खिलाफ पुनरीक्षण याचिका दायर की थी।
जमशेदपुर के न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत ने 19 अक्टूबर 2012 को चालक को भारतीय दंड संहिता की धारा 279, 337 और 304-ए के तहत दोषी ठहराया था। निचली अदालत ने अधिकतम दो वर्ष के सश्रम कारावास के साथ कुल छह हजार रुपये का जुर्माना लगाया था। बाद में अपीलीय अदालत ने भी उस निर्णय को बरकरार रखा था।
अब हाईकोर्ट से पुनरीक्षण याचिका खारिज होने के बाद निचली और अपीलीय अदालतों का फैसला प्रभावी रहेगा। आदेश के अनुसार आगे की प्रक्रिया चालक के आत्मसमर्पण और संबंधित निचली अदालत में होने वाली कानूनी कार्रवाई पर निर्भर करेगी।